महंगाई की मार, अब पैग भी होगा दुश्वार’: छत्तीसगढ़ सरकार का मदिरा प्रेमियों को 1 अप्रैल का ‘उपहार’

रायपुर: छत्तीसगढ़ के ‘ग़मगीन’ मदिरा प्रेमियों के लिए एक ऐसी खबर आई है जिसे सुनकर बिना पिए ही सिर चकरा जाए। साय सरकार ने तय किया है कि अगर आपको अपना गम गलत करना है, तो पहले अपनी जेब खाली करने का कलेजा रखना होगा। 1 अप्रैल (जी हां, वही मूर्ख बनाने वाला दिन) से प्रदेश में जाम छलकाना और भी ‘कीमती’ अनुभव होने वाला है।

सरकार का ‘स्वास्थ्य’ प्रेम या खजाने का ‘मोह’?

सरकार ने नए राजपत्र में ड्यूटी की दरों को इस तरह बढ़ाया है जैसे वो चाहती हो कि लोग शराब छोड़कर सीधे हिमालय चले जाएं। लेकिन जानकार कहते हैं कि यह असल में “नशा मुक्ति अभियान” नहीं, बल्कि “खजाना भर्ती अभियान” है।

कुछ ‘कड़वे’ घूंट:

  • कांच छूटा, प्लास्टिक आया: सरकार अब कांच की बोतलों से तौबा कर रही है। अब आपको शराब ‘प्लास्टिक’ में मिलेगी। तर्क ये है कि कांच टूट जाता था, जिससे नुकसान होता था। अब सरकार पर्यावरण की चिंता करे या टूटे हुए कांच की, ये तो वक्त बताएगा। वैसे भी, प्लास्टिक में ‘नशा’ थोड़ा ‘इको-फ्रेंडली’ जो लगेगा!

  • प्रीमियम वालों को प्रीमियम झटका: अगर आप खुद को रईस समझते हैं और महंगे ब्रांड्स पीते हैं, तो सरकार ने आपके लिए ₹970 प्रति प्रूफ लीटर की ड्यूटी का ‘रेड कारपेट’ बिछाया है। मतलब, अब ‘स्टेटस सिंबल’ बनाए रखने के लिए घर गिरवी रखने की नौबत आ सकती है।

    • देसी का सहारा, वो भी अब नहीं रहा प्यारा: जो लोग ₹435 की ड्यूटी सुनकर सोच रहे थे कि देसी से काम चला लेंगे, उन्हें बता दें कि अब ‘मसाला’ और ‘प्लेन’ भी आपके घरेलू बजट का तड़का बिगाड़ने के लिए तैयार हैं।

    विशेष टिप्पणी: “1 अप्रैल से शराब पीना एक साहसिक कार्य माना जाएगा। जो व्यक्ति अपनी पूरी सैलरी आबकारी विभाग को दान करके घर खाली हाथ लौटेगा, उसे ‘परम वीर चक्र’ तो नहीं, पर ‘परम पियक्कड़’ का खिताब जरूर मिल सकता है।

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