
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें चुनाव आयोग से असम में चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) कराने का निर्देश मांगा गया था। सीजेआइ ने कहा, अब कुछ भी शेष नहीं है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्य बागची तथा विपुल एम. पंचोली की पीठ ने गुरुवार को चुनाव आयोग की उस दलील पर ध्यान दिया कि असम में अंतिम मतदाता सूची पहले ही तैयार की जा चुकी है और याचिका अब अप्रासंगिक हो गई है। मृणाल कुमार चौधरी की दायर की गई जनहित याचिका ने चुनाव आयोग के उस निर्णय को चुनौती दी, जिसमें असम में अन्य राज्यों की तुलना में सामान्य विशेष संशोधन करने का निर्णय लिया गया था। कार्यवाही के दौरान याचिकाकर्ता के लिए उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने कहा कि राज्य को मतदाता सूची की अखंडता सुनिश्चित करने के लिए एक गहन संशोधन की आवश्यकता है। हालांकि, चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस.नायडू ने पीठ को सूचित किया कि असम के लिए अंतिम मतदाता सूची पहले ही 10 फरवरी को प्रकाशित की जा चुकी है।
पीठ ने इस मामले की संवेदनशीलता पर जोर दिया, यह बताते हुए कि वर्तमान विधायी और न्यायिक ढांचे के तहत चुनाव आयोग को मनमाने तरीके से व्यक्तियों को विदेशी घोषित करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि ऐसे निर्धारणों के लिए वैधानिक कट-ऑफ तिथियां और विशेष न्यायाधिकरण होते हैं। सीजेआई ने हंसारिया से कहा, आपको बहुत संवेदनशील और सतर्क रहना होगा। यह याचिका चुनाव आयोग के 17 नवंबर 2025 के ज्ञापन को रद करने का निर्देश मांगती है, जिसमें असम में एसआईआर के बजाय विशेष संशोधन का आदेश दिया गया था।
इसने 2026 असम विधानसभा चुनावों से पहले जून 2025 में बिहार में किए गए एसआइआर के समान मानकों पर एसआइआर कराने का भी निर्देश मांगा। विशेष संशोधन के समापन के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी के डाटा से पता चला कि असम में कुल मतदाता संख्या 2.43 लाख घट गई है।


























