पटना: जेडीयू राज्य कार्यकारिणी की बैठक के दौरान शनिवार को सीएम नीतीश का दर्द छलका. उन्होंने बैठक के दौरान जिस लहजे में पार्टी नेताओं को संबोधित किया उससे यह स्पष्ट हो गया कि बिहार में तीसरी नंबर की पार्टी बनने का दर्द वे भूल नहीं पा रहे. उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में उन्हें समझ ही नहीं आया कि कौन साथ दे रहा और कौन नहीं? सीएम नीतीश के इस बयान से सूबे की सियासत गरमा गई है.

इसी क्रम में शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी सीएम नीतीश के समर्थन में उतरे और ट्वीट कर कहा कि राजनीति में गठबंधन धर्म को निभाना अगर सीखना है तो नीतीश जी से सीखा जा सकता है. गठबंधन में शामिल दल के आंतरिक विरोध और साजिशों के बावजूद भी उनका सहयोग करना नीतीश जी को राजनैतिक तौर पर और महान बनाता है. नीतीश कुमार के जज़्बे को मांझी का सलाम.

इधर, सीएम नीतीश के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि इतनी तकलीफ है तो कुर्सी छोड़ दें. वहीं, तेजस्वी यादव ने उनके बयान पर कहा कि जाकी रही भावना जैसी , प्रभु मूरत देखी तिन तैसी. मतलब जिसकी जैसी सोच होती है, वो अगले को भी उसी नजरिए से देखता है.

मालूम हो कि बिहार चुनाव में पिछड़ने के बावजूद नीतीश कुमार सीएम तो बन गए हैं. लेकिन बिहार में तीसरे नंबर की पार्टी बनने का दर्द नीतीश कुमार अब तक नहीं भूल पाए हैं. शनिवार को जेडीयू राज्य कार्यकारिणी की बैठक में आए नेताओं को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश ने साफ तौर पर कहा कि एनडीए में सीट बंटवारे में देरी से जेडीयू को नुकसान हुआ.

उन्होंने कहा कि पता नहीं चला कौन दोस्त थे और कौन दुश्मन? एनडीए में सीटों का बंटवारा 5 महीना पहले तय होना चाहिए था. लेकिन इसमें बहुत देरी हुई. इतना कम समय था कि पता ही नहीं चला कौन साथ दे रहा है और कौन नहीं. उन्होंने कहा कि उन्हें हार का संदेह चुनाव के समय ही हो गया था.

गौरतलब है कि बिहार चुनाव में नीतीश की पार्टी 43 सीटों पर सिमट गई थी जबकि बीजेपी को 74 सीटें मिली थीं. वहीं, आरजेडी 75 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी.