
प्रतिदिन काफी मात्रा में हो रही है कोयले की चोरी
चरचा कॉलरी। एसईसीएल बैकुंठपुर क्षेत्र मुख्यालय के विभागीय सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से कोयला चोरी के एक मामले का खुलासा हुआ है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में की गई कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार बुधवार की रात्रि एसईसीएल मुख्यालय में तैनात सुरक्षा प्रहरी विनोद, विशाल एवं निरंजन गश्त पर थे। इसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि चरचा थाना के समीप शिवपुर-कठोतिया पारा के पास कुछ वाहनों में कोयला भरकर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही सुरक्षा कर्मी तत्काल मौके पर पहुँचे, जहाँ कोयले से भरी वैगनआर कार क्रमांक ष्टत्र 07 रू 2680 को रोका गया।वाहन चालक की पहचान धीरज जायसवाल, निवासी बैकुंठपुर के रूप में हुई। सुरक्षा कर्मियों ने वाहन सहित चालक को पकडक़र चरचा थाना के सुपुर्द किया। थाना प्रभारी प्रमोद पांडे द्वारा बीएनएस की धारा 35, 1(4)/305 के तहत कार्रवाई करते हुए वाहन जब्त किया गया तथा चालक को गिरफ्तार किया गया। इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर और सोचनीय पहलू यह है कि विभागीय सुरक्षा कर्मियों ने स्पष्ट रूप से वैगन आर वाहन में लगे कोयला को चरचा कालरी का कोयला मानते हुए पकड़ा उन्हें इस पूरे प्रकरण पर एफ आई आर दर्ज करना चाहिए था इसके बावजूद मामला मात्र संदेह के आधार पर दर्ज किया गया। जबकि यह स्पष्ट रूप से अपराध है व बेहद विचारणीय पहलू है। गौरतलब है कि चरचा कॉलरी प्रबंधन के पास स्वयं की प्रयोगशाला उपलब्ध है, जहाँ कोयले की तत्काल जाँच कर उसकी गुणवत्ता व स्रोत की पुष्टि की जा सकती थी। क्षेत्र में मिलने वाला चरचा खदान का कोयला विशिष्ट गुणवत्ता का होता है, जो अन्यत्र कहीं उपलब्ध नहीं है। इसके अतिरिक्त, आसपास कोई अधिकृत डिपो या सेल काउंटर भी मौजूद नहीं है जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि जब्त कोयला चरचा खदान से ही चोरी किया गया, इसके अतिरिक्त भारी ठंड के मौसम में मुख्य मार्ग की जगह गांव के रास्ते कोयले से भरी वहां का मिलन अपने आप में बेहद संदेहास्पद है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, चरचा कॉलरी के डी-पॉइंट और सी-पॉइंट क्षेत्रों से देर रात लगातार काले रंग की बोलेरो एवं वैगनआर, मारुति वैन आदि वाहनों के माध्यम से कोयले की चोरी की जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कोयला चोरी किया जाता रहा है, लेकिन अब तक प्रभावी और ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।सूत्रों का यह भी दावा है कि इस कोयला चोरी के खेल में कुछ स्थानीय छुटभैया नेता और प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं, जिनके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। ऐसे में केवल वाहन चालक पर कार्रवाई कर मामले को हल्का करना, पूरे तंत्र की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाता है। कोयला चोरी की बढ़ती घटनाएँ न केवल एसईसीएल को आर्थिक नुकसान पहुँचा रही हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक साख को भी कमजोर कर रही हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संगठित कोयला चोरी आने वाले समय में और भी गंभीर रूप ले सकती है।


















