
2003 की मतदान स्थिति जानने में परेशानी
कोरबा। भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा वास्तविक मतदाताओं की पहचान करने और अपात्रों की छंटनी के इरादे से देश भर में एसआईआर यानि विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। वर्ष 2003 की मतदान स्थिति और सूची के हिसाब से मौजूदा सूची का मिलान किया जा रहा है। बूथ लेबल अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में गणना पत्रक बांटने में व्यस्त हैं। इस पत्रक को भरना मतदाता की जिम्मेदारी है। ऐसे में 22 साल पहले के किरार्ड की तलाश में मतदाताओं का सिर चकरा रहा है। अब वे पुराने ठिकानों के बारे में विचार करने के साथ मशक्कत कर रहे हैं।
कोरबा जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर का काम जारी है। नवंबर से शुरू हुआ यह काम फरवरी 2026 तक पूरा होना है। कुछ राज्यों में फर्जी वोटर्स के मामले सामने आने के बाद अब यह राष्ट्रीय मुद्दा बना हुआ है और इसी इरादे से एसआईआर कराई जा रही है ताकि वास्तविक मतदाताओं की खोज हो सके। कोरबा में जिला प्रशासन के द्वारा सभी क्षेत्रों में बीएलओ की ड्यूटी लगाने से पहले उन्हें इस बारे में विधिवत प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें पूरी प्रक्रिया बताई गई ताकि मैदानी क्षेत्र में काम के दौरान दिक्कत न हो और लोगों के सवालों और उनकी शंकाओं का समाधान किया जा सके। कोरबा विधानसभा के साथ-साथ तीन अन्य विधानसभा क्षेत्र में गणना पत्रक वितरण का काम प्रारंभ हो चुका है और सभी मतदाताओं तक बीएलओ व सहयोगी की टीम पहुंचने की कोशिश कर रही है। हालांकि गणना पत्रक केवल एक पेज का है और उसमें जानकारी सीमित ही भरी जानी है। लेकिन नीचे के हिस्से में वर्ष 2003 में किए गए मतदान को लेकर जो जानकारी चाही गई है उससे लोगों के सामने मुश्किल है। अस्थाई रूप से रहने वाले लोगों को भलीभांति ऐसी जानकारी याद भी नहीं है और अगर है तो बूथ की संख्या से लेकर भाग संख्या की तलाश में काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। हालांकि भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी वेबसाइट में इसका विकल्प दिया है। इसके जरिए लोग जानकारी ले सकते हैं। वहीं कुछ सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर मतदाताओं को सहूलियत देने के लिए कुछ लिंक भी भेजी जा रही है लेकिन इसी के साथ ओटीपी के फंडे ने उलझने बढ़ा दी है। आखिरकार जिला प्रशासन को इस बारे में अधिकृत रूप से प्रेस नोट जारी कर लोगों को आगाह करना पड़ा कि वे गणना पत्रक भरने की कड़ी में ओटीपी के लिए आने वाले किसी भी फोन को महत्व न दें। ऐसी स्थिति में साइबर फ्रॉड करने वालों को हतोत्साहित किया जा सकता है।
आधार का वैकल्पिक बनाने पर सवाल
भारत सरकार ने बीते वर्षों में अरबों रुपए का प्रोजेक्ट तैयार कर नागरिकों को विशेष पहचान पत्र जारी करने के लिए योजना बनाई। इसे आधार नाम दिया गया। खास बात यह है कि खेती किसानी से लेकर सरकार की योजनाओं और अन्य सभी महत्वपूर्ण मामलों में आधार को अनिवार्य किया गया ताकि नागरिकों की जानकारी एकीकृत हो सके। इधर मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम में आधार को वैकल्पिक किया गया है। इससे सवाल उठता है कि क्या अब आधार महत्वपूर्ण नहीं रहा।
बीएलओ से मार्गदर्शन का नियम
मतदाता सूची पुनरीक्षण के इस विशेष कार्यक्रम में लोगों को याद रखना होगा कि उनके पास जो गणना पत्रक बूथ लेवल अधिकारी के जरिए पहुंच रहा है, उसे लोगों को मार्गदर्शन भी देना है। बताया गया कि इस अभियान के शुरू होने से ठीक पहले बूथ लेवल अधिकारियों को कोरबा के विद्युत गृह विद्यालय में विशेष प्रशिक्षण दिया गया जिसमें उन्होंने वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मौजूदा सूची का मिलान किया। यानि तय है कि बीएलओ को मतदाताओं की स्थिति के बारे में बेहतर जानकारी है। कहा गया कि जिन लोगों को भ्रम की स्थिति है वे गणना पत्रक की उपरी हिस्से से बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर देखकर मसले को सुलझाएं।























