चंगाई सभा या धर्मांतरण की साजिश? अंबिकापुर में रिटायर्ड महिला अफसर गिरफ्तार, हिंदुवादी संगठनों की शिकायत पर पुलिस की बड़ी दबिश

अंबिकापुर | 29 जनवरी 2026 अंबिकापुर में कथित तौर पर चंगाई सभा की आड़ में चल रहे धर्मांतरण के बड़े खेल का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए गांधीनगर पुलिस ने जिले की एक सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) डिप्टी कलेक्टर ओमेगा टोप्पो को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उनके निवास पर लंबे समय से प्रलोभन और दबाव के जरिए धर्म परिवर्तन की गतिविधियां संचालित की जा रही थीं।

रविवार की प्रार्थना सभा में मचा हंगामा

घटनाक्रम की शुरुआत 25 जनवरी, रविवार को हुई जब नमनाकला स्थित ओमेगा टोप्पो के आवास पर भारी भीड़ जुटी थी। हिंदूवादी संगठनों को सूचना मिली कि घर के भीतर 50 से अधिक लोगों की मौजूदगी में चंगाई सभा चल रही है। मौके पर पहुंचे संगठनों के पदाधिकारियों ने देखा कि घर के बाहर वाहनों का जमावड़ा है और अंदर प्रार्थना के नाम पर हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं।

पुलिस और प्रशासन को रोकने की कोशिश

हंगामे की सूचना मिलते ही गांधीनगर पुलिस और नायब तहसीलदार की टीम मौके पर पहुंची। बताया जा रहा है कि शुरुआत में आयोजकों ने जांच टीम को भीतर प्रवेश करने से रोकने का प्रयास किया। रिटायर्ड अफसर ओमेगा टोप्पो ने पुलिसकर्मियों से कार्रवाई के आदेश की प्रति मांगते हुए तीखी बहस भी की। हालांकि, सख्ती दिखाने पर पुलिस ने भीतर प्रवेश किया और वहां से एक महत्वपूर्ण रजिस्टर जब्त किया, जिसमें सभा में शामिल होने वाले लोगों का रिकॉर्ड दर्ज था।

जांच में प्रलोभन और अवैध सभा की पुष्टि

पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि:

  • मतांतरण का प्रयास: सभा में मौजूद कम से कम 4-5 लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित और प्रलोभित किया जा रहा था।

  • बिना अनुमति आयोजन: घनी बस्ती के बीच बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के हर रविवार को यह सभा आयोजित की जाती थी।

  • विवादास्पद सामग्री: शिकायतकर्ता रोशन तिवारी के अनुसार, सभा में अन्य धर्मों के विरुद्ध भड़काऊ बातें कही जा रही थीं।

    गिरफ्तारी और कानूनी धाराएं

    गांधीनगर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि आरोपी ओमेगा टोप्पो को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 270 (संक्रमण फैलाने की संभावना वाला कार्य), 299 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) और छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम की धारा 5 (क) के तहत गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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