
दक्षिणी दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में दूषित पानी के सप्लाई की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि यह मौतों की भी बड़ी वजह बन रहा है। दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे अधिक खतरनाक साबित हो रहा हैं।
बार-बार होने वाला दस्त बच्चों में कुपोषण और शारीरिक विकास में बाधा बन सकता है, जबकि बुज़ुर्गों में यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसके अलावा रासायनिक तत्व भी पानी को दूषित कर जनस्वास्थ्य के लिए खतरे बढ़ा रहे हैं। पानी में केवल जीवाणु ही नहीं, बल्कि फ्लोराइड, नाइट्रेट और आर्सेनिक जैसे रसायन भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। दिल्ली सरकार के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2024 में कुल 90,833 मौतें दर्ज की गईं। इनमें से 21,427 मौतें यानी लगभग 24 प्रतिशत सीधे तौर संक्रामक और परजीवी रोग के चलते हुई है। वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 28.66 प्रतिशत तो वहीं 2022 में 26.39 प्रतिशत रहा। यानी दूषित पेयजल अब केवल किसी एक इलाके की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है।

























