
गोरखपुर, 0९ अगस्त।
लालच का जाल बिछा, एजेंटों ने लोगों से रुपये जुटाए और संस्था आठ करोड़ रुपये लेकर चुपचाप भाग निकली। गोरखपुर में द लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट थ्रेफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी के खिलाफ 500 से ज्यादा निवेशकों ने धोखाधड़ी की शिकायत की है। पुलिस जांच में सामने आया कि इस सोसाइटी के खिलाफ वाराणसी, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भी केस दर्ज हैं। कोतवाली थाने में दर्ज मुकदमे को लेकर आरबीआई से पुलिस ने जानकारी मांगी है। जवाब के आधार पर कार्रवाई की दिशा तय होगी। कोतवाली थाना क्षेत्र में सक्रिय रही सोसाइटी का कार्यालय वर्ष 2017 में घोष कंपनी चौराहे पर खुला था। निवेशकों की संख्या बढ़ी तो कार्यालय एल्युमिनियम फैक्ट्री के पास स्थानांतरित कर दिया गया। संस्था से करीब 45 एजेंट जुड़े थे जो लोगों को पांच वर्ष में रुपये दोगुणा होने का लालच देकर जोड़ते रहे। 2024 तक कुछ रकम लौटाई भी गई, लेकिन फिर साइट अपडेट होनी बंद हो गई और भुगतान रुक गया। सोसाइटी के विरुद्ध उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज है। वहां पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
एजेंटों के अनुसार, नवंबर 2024 में वेबसाइट की गतिविधियां अचानक बंद हो गईं और फरवरी 2025 में फर्जीवाड़े की पूरी सच्चाई सामने आई। कोतवाली थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर इस मामले में 11 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। सीओ कोतवाली ओंकार दत्त ने बताया कि एजेंटों द्वारा दिए गए साक्ष्य आरबीआइ को ईमेल किया गया है। जबाव मिलने के बाद साक्ष्य के साथ विवेचक आरबीआई कार्यालय भेजकर जांच कराई जाएगी जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।