
जनकपुर। एमसीबी जिले के भरतपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरिहा के सरपंच सचिव द्वारा 15 वां वित्त योजना के पैसे में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। स्वच्छता और पेयजल के नाम पर फर्जी बिलों को लगाकर फर्जीवाड़ा किया गया है। सरकार भले ही गावों के ग्रामीण जनता के लिए तरह तरह के ग्रामीण विकास का सपना देखकर लाखों करोड़ों रुपए का बजट पंचायतों को देती है। लेकिन इन पैसों में आधा पैसा को सरपंच सचिव व जनपद के जिम्मेदारों और बिचौलिया मिलीभगत करके हजम कर लेते है। पंचायतों में इस तरह से भारी भरकम भ्रष्टाचार किए जाने से सरकार की जनहितैषी योजना रायपुर से आकर भरतपुर जनपद के ग्रामीण इलाकों में आकर दम तोड़ देती है। ऐसा ही मामला एमसीबी जिले की भरतपुर जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरिहा में स्वच्छता अभियान एवं 15 वां वित्त योजना के तहत अधिकांश कार्य या तो कागज में हुए है, या कि अनुपयोगी और गुणवत्ताहीन हुए है। ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के लिये संचालित योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं जब प्रदेश के मुखिया रायपुर से योजनाओं का ऐलान करते है और लाखों करोड़ों रूपए का बजट पेश करते है तो ऐसा लगता है कि अब ग्रामीण इलाकों में विकास होगा लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में हकीकत इसके उलट नजर आता है। ग्राम पंचायत सेमरिहा को सरकार से मिले 15 वां वित्त का पैसा को सरपंच सचिव और जनपद के जिम्मेदार कमाई का जरिया बनाकर फर्जी बिलों से पूरा पैसा हजम कर लिए। यहां स्वच्छता एवं पेयजल के नाम पर फर्जी बिलों को लगाकर भ्रष्टाचार किया गया है। जबकि स्वच्छता अभियान के तहत सेमरिहा पंचायत क्षेत्र में लाखों रुपए खर्च करके गरीबों के घरों में शौचालय बनाये गये लेकिन किसी शौचालय में दरवाजे नहीं है तो किसी में छत का पता नहीं है। इतना ही नहीं इनके गुणवत्ता का भी कोई भरोसा नहीं है। जिससे ग्रामीण लोग शौचालय का उपयोग भी नहीं करते है। जो कि अब अनुपयोगी होकर खंडहरनुमा आकृति लिये हुए खड़े है और ग्रामीण जनता गलियों एवं सडक़ो के किनारे तथा मैदान में शौच कर रहे है। जनपद क्षेत्र अंतर्गत और भी कई ऐसी ग्राम पंचायते हैं जहां शासन का नियम और आदेश को सचिव सरपंच सरेआम उल्लंघन करते हैं।
















