
नई दिल्ली। पाकिस्तान में सेना और खुफिया एजेंसी आइएसआइ के बीच दरार की खबर है। इसके चलते सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर ने आइएसआइ के शीर्ष पदों पर व्यापक बदलाव किया है। ऐसा हाल के महीनों में कई मामलों की पूर्व जानकारी न जुटा पाने के चलते किया गया।इस तरह के मामलों में पाकिस्तानी सेना को बड़ी चोट खानी पड़ी और चरमपंथियों के हमलों में तमाम सैनिक गंवाने पड़े। अफगानिस्तान के साथ चल रही लड़ाई से पूर्व में आइएसआइ की भूमिका को कमजोर पाया गया है। पाकिस्तान में सेना और आइएसआइ के मिलकर कार्य करने का इतिहास रहा है। यही दोनों संगठन पाकिस्तान में सरकार की दशा और दिशा भी तय करते हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में उनकी चाल बदल गई है। हाल के महीनों में सेना को कई मौकों पर नीचा देखना पड़ा है या तीखी आलोचना झेलनी पड़ी है। चरमपंथी संगठन टीटीपी और बलूच लड़ाकों ने सेना की नाक में दम रखा है लेकिन उन्हें रोकने के लिए आइएसआइ कुछ खास नहीं कर पाई।
देश के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में टीटीपी की समानांतर सरकार चलती है और वहां पर चेक प्वाइंट बनाकर लड़ाके वसूली भी कर रहे हैं। कमोबेश ऐसे ही हालात बलूचिस्तान प्रांत के हैं।
वहां पर पाकिस्तानी सेना के तमाम सैनिक मारे जा चुके हैं और कई सीमा चौकियों पर हमले हुए हैं। लेकिन आइएसआइ उनके बारे में कोई पूर्व सूचना नहीं जुटा सकी। मुनीर ने इसी सप्ताह सेना और आइएसआइ के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की है। बैठक में तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान नेशनल एजेंसी (बीएलए) के खात्मे के लिए प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।




























