
नईदिल्ली, ३० अगस्त ।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महिला को बरी करते हुए कहा कि सास-ससुर द्वारा दहेज के लिए बहू को प्रताडि़त करने की बात हवा से भी तेज फैलती है। इस महिला पर अपनी बहू को क्रुरता का शिकार बनाने का आरोप था।न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के उस फैसले को पलटते हुए ये फैसला सुनाया, जिसने सास को दोषी पाते हुए तीन साल की सजा बरकरार रखी थी। महिला ने अपनी मृत्यु से पूर्व स्वजनों से कहा था कि ससुराल पक्ष उसे दहेज के लिए प्रताडि़त कर रहा है।हालांकि, शीर्ष अदालत ने कहा कि गवाह के तौर पर पेश हुई अपीलकर्ता की पड़ोसी ने दावा किया कि ससुराल पक्ष ने कभी कोई दहेज की मांग नहीं की।
पीठ ने कहा, उसकी गवाही को ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि वह दहेज की मांग के संबंध में कोई तथ्य नहीं बता सकती, क्योंकि यह चार दीवारों के भीतर होता है। यह एक गलत निष्कर्ष है, खासकर ऐसे मामलों में जहां दहेज के लिए बहू को प्रताडि़त करने की बात हवा से भी तेज फैलती है। मृतका के पिता ने जून 2001 में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी ससुराल में मृत पाई गई थी। आरोप था कि उसकी मृत्यु के समय वह गर्भवती थी और वह बताया करती थी कि उसकी सास दहेज के लिए उसे ताने मारती थी। ट्रायल कोर्ट ने माना था कि महिला की मौत उत्पीडऩ के कारण आत्महत्या से हुई थी। सास ने उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की बांद्रा परिवार अदालत को एक हाईप्रोफाइल तलाक के मामले को तीन महीने में निपटाने को कहा है।
बता दें कि उद्योगपति जयदेव श्रॉफ और उनकी पत्नी पूनम जयदेव श्रॉफ के बीच तलाक का मामला एक दशक से चल रहा है।प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया और आरोक अराधे की पीठ ने कहा कि तलाक के मामलों पर निर्णय लेने के लिए नौ महीने काफी होते हैं। शीर्ष अदालत ने गौर किया कि ये मामला 2015 से लंबित है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अगर कोई पक्ष कार्यवाही में देर करता है तो उसके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है।