दिल्लीः तुर्कमान गेट के आस-पास कर्फ्यू जैसे हालात, पैदल आने-जाने पर भी पाबंदी, दुकानें बंद; आई आपातकाल की याद

नई दिल्ली। आसफ अली मार्ग स्थित तुर्कमान गेट के सामने 50 वर्ष बाद मंजर दोहरा रहा है। जहां बुलडोजर गरज रहा है और कर्फ्यू जैसा माहौल है। दरगाह फैज इलाही का अतिक्रमण तोड़ने के बाद से तुर्कमान गेट के आसपास का माहौल तनावपूर्ण है। पुरानी दिल्ली का यह इलाका अनिश्चितता और आशंका से घिरा हुआ है। मुख्य मार्ग से लेकर गलियों तक में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात है। जगह-जगह बैरिकेडिंग, वाहन और ठेले खड़े कर वाहनों के आवाजाही के साथ ही लोगों के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। आसफ अली मार्ग, तुर्कमान गेट मुख्य बाजार, चितली कबर, तिराहा बैरम खां, गधे वालान जैसे बाजार के साथ दुकानें बंद है तो लोग घरों में दुबके हुए हैं। कहीं लोग जमा हो रहे हैं तो उन्हें तुरंत हटने को कहा जा रहा है।

स्थानीय लोग मामले में कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं, जबकि, अफवाहों का बाजार गर्म है। अच्छी बात यह रही है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ ही प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया कि यह कार्रवाई मस्जिद पर नहीं बल्कि उससे सटे निर्माण पर हुई है। हालांकि, जो तनाव और अनिश्चितता है उसमें कुछ दिनों तक यहां के हालात ऐसे ही रह सकते हैं।

आपातकाल में भी चला था बुलडोजर

करीब 50 वर्ष पूर्व आपातकाल के दौरान भी तुर्कमान गेट के आस-पास बुलडोजर ने घरों-दुकानों को निशाना बनाया था। वर्ष 1976 में 19 अप्रैल को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के आदेश पर यहां बुलडोजर कार्रवाई हुई थी और करीब 700 मकानों को तोड़ा गया था।

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