सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी जिले में चल रही है अनेक आरामशीन

सीताराम नायक
जांजगीर-चांपा। जांजगीर चांपा जिला वन संपदा की दृष्टि से प्रदेश में सबसे गरीब जिला है यहां जंगलों की संख्या नहीं के समान है इसके बावजूद वन विभाग का अमला पेड़ों की संरक्षण एवं सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है नतीजा यह है कि जांजगीर चांपा जिले में वनों की अवैध रूप से कटाई हो रही है। देखा जा रहा है की वन विभाग में पदस्थ अधिकारी एवं कर्मचारी माफिया को संरक्षण देने के मामले में सबसे अग्रणी है वहीं कम समय में अधिक संपत्ति अर्जित करते जा रहे हैं जिसके कारण वन माफिया पूरी तरह सक्रीय होकर मशीनों के द्वारा पेड़ों की कटाई रातों-रात कर लेते हैं। वन संपदा कम होती जा रही है और वन विभाग के जंगल लगातार कटाई से उजडऩे लगे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन द्वारा जांच कराए जाने की आवश्यकता है।
यहां यह बताना आवश्यक है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वनों की सुरक्षा के लिए एक दिशा निर्देश जारी किया गया था कि वन विभाग के जंगलों से 10 किलोमीटर (हवाई मार्ग) दूरी में संचालित आरा मशीनों को पूर्ण रूप से बंद किया जाए क्योंकि इन आरा मशीनों के संचालन से पेड़ों की अवैध एवं निरंतर कटाई होते रहती है। उक्त आदेश का पालन करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है लेकिन इन जंगलों के पास संचालित आरा मशीनों को बंद नहीं किया वे आज भी आबाद है जिनके कारण जंगल उजडऩे लगे हैं।
ज्ञात हो कि जांजगीर चांपा जिले में पकरिया के पास वन विभाग का जंगल है इसी तरह छाता जंगल, इंदिरा उद्यान के अलावा बलौदा क्षेत्र में छाता, खिसोरा, पत्तोंरा वनों का जंगल है जिसके रहने से क्षेत्र में पर्यावरण एवं वायुमंडल सुरक्षित एवं सुरक्षित रहता है। लेकिन इसे भी अब वन माफियाओं का नजर लगने लगा है। इसके 10 किलोमीटर दूरी हवाई मार्ग पर अनेक आरा मशीन संचालित हो रही हैं जो इन जंगलों के बड़े-बड़े पेड़ों को काटकर पर्यावरण को नष्ट कर रहे हैं। इस क्षेत्र के लोग छोटी-छोटी झाडिय़ों को अहाता घेरने के लिए काट कर ले जा रहे हैं तो वहीं बड़े पेड़ों को आरा मशीनों में खपाया ज रहा है।
इसके अलावा बहुत से छोटे-छोटे स्थान है जहां वन विभाग ने वृक्षारोपण की है उसका भी भगवान मालिक ही है। जो सुरक्षा के अभाव में दम तोडऩे लगे हैं यहां पदस्थ वन अधिकारियों के पास वन संपदा बढ़ाने कोई कार्य योजना नहीं है और ना ही सुरक्षा को लेकर वे गंभीर नजर आ रहे हैं नतीजा जंगल दिनों दिन उजडऩे लगे है। बताया जाता है कि जांजगीर चांपा के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों मे संचालित आरा मशीने जंगलों के हवाई मार्ग में 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है किंतु विभाग अमला द्वारा इसे नजरअंदाज करते हुए संरक्षण दिया जा रहा है।
अर्जुन के पड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई
इस बात को सभी जानते हैं कि अर्जुन के पेड़ को विभाग द्वारा विशेष महत्व देते हुए इसके कटाई पर शासन द्वारा रोक लगा दी गई है लेकिन अधिकतर आरा मशीनों में अर्जुन के ही पेड़ों की चिराई एवं सप्लाई विभिन्न स्थान पर हो रही है विशेष कर आरा मशीनों के माफिया द्वारा किसानों को अर्जुन के पेड़ों का अधिक उपयोग नहीं है यह बताया जाता है वहीं इसे एक जलाऊ लकड़ी के रूप में ही काम आने वाला कहकर बड़े-बड़े पेड़ों को कम दामों में खरीद कर रहे हैं और किसान भी अपने बहरा खेती एवं नदी,नालों के किनारे स्थित अपने अर्जुन के पेड़ों को अनवरत रूप से काटकर इसे आरा मशीन संचालकों को बेच रहे हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेड़ों की संख्या लगातार घट रही है तथा धरती उजाड़ होने लगी है ऐसे लोगों पर सख्ती से कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

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