श्रीकृष्ण-सुदामा कथा सुनने उमड़े भक्त

जांजगीर। ग्राम भंवरमाल में बाबूलाल बरेठ के निवास पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के सातवें दिन कथावाचक पं. नागेंद्र चतुर्वेदी ने कहा कि सच्ची मित्रता में धन और पद कभी बाधा नहीं बनते, इसका जीवंत उदाहरण श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता है। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथावाचक ने बताया कि सुदामा अत्यंत गरीब ब्राह्मण थे। पत्नी की सलाह पर वे द्वारका में अपने मित्र श्रीकृष्ण से मिलने गए। भेंट स्वरूप पड़ोस से लाए गए पोहे फटे कपड़े में बांधकर ले गए। द्वारका पहुंचकर सुदामा सोने की नगरी देखकर दंग रह गए। श्रीकृष्ण ने स्वयं दौडक़र उनका स्वागत किया और प्रेमपूर्वक पोहे ग्रहण किए।
विदाई के समय सुदामा बिना कुछ मांगे लौट आए, लेकिन घर पहुंचने पर उन्होंने अपनी झोपड़ी की जगह भव्य घर देखा। यह श्रीकृष्ण की कृपा थी, जिसने उनकी गरीबी और दुख दूर कर दिए।
इस अवसर पर यजमान बाबूलाल बरेठ, उर्मिला बरेठ, कमलकिशोर बरेठ, ऐश्वर्या बरेठ, नंदकिशोर बरेठ, दुर्गेश्वरी, विमल किशोर बरेठ, वर्षा बरेठ, जिला पंचायत महिला विकास सभापति मोहन कुमारी, चित्रभानु पांडेय, जितेंद्र तिवारी, पंचराम कश्यप, राजेंद्र कश्यप, क्रांति कश्यप, देवचंद, हर्षित, सौरभ, अजय, अभय, चंद्रप्रकाश साहू, कुणाल, सुमीत, हर्षकांत रजक, पूनम रजक, दामिनी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

RO No. 13467/10