
जांजगीर। किसानों को सरकारी योजनाओं का एक साथ लाभ दिलाने के लिए प्रशासन फार्मर आईडी बनवा रहा है। इसे जरूरी बताकर किसानों को ग्रामीण क्षेत्रों के च्वाइस सेंटर भेजा जा रहा है, लेकिन सेंटर पर पहुंचने के बाद किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में किसान शुरुआती दौर में अड़चनें देखकर परेशान हैं।
राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र में डिजीटल क्रांति लाने के लिए पट्टाधारी किसानों के जमीनों का फार्मर आईडी बनाने की शुरुआत की गई है। लेकिन इस आईडी के लिए किसानों की परेशानी शुरु हो गई है। किसी के जमीन ऑनलाइन नहीं दिख रहे हैं तो किसी का नाम में त्रुटि है। कृषि फार्मर आईडी के जरिए किसानों का पंजीयन कर भूमि फसल, सब्सिडी पर उपलब्ध कराए जा रहे खाद, बीज, कृषि यंत्र व किसान सम्मान निधि की जानकारी दर्ज कराई जाएगी। कृषि फार्मर आईडी बनवाने के लिए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों व राजस्व पटवारियों के द्वारा गांव-गांव में मुनादी कराते हुए प्रचार प्रसार किया गया है और आईडी बनवाने पर जोर दिया जा रहा है। यहां तक कि यह भी कहा जा रहा है कि किसान सम्मान निधि योजना की आगामी किस्त का हस्तांतरण भी फार्मर आईडी के आधार पर होगा। इसके लिए किसान अपने फार्मर आईडी बनवाने के लिए च्वाइस सेंटर में जाकर एग्री स्टेक पोर्टल पर पंजीयन कराने पर पहुंच रहे हैं, लेकिन किसानों को पोर्टल पर जमीन का ऑनलाइन रिपोर्ट नहीं दिख रही है।
48 हजार किसानों का आईडी जनरेट किया गया: नितिन ट्टई डिस्ट्रिक मैनेजर नितिन वर्मा ने बताया कि नए-नए बदलाव भी किए जा रहे हैं, जिसके कारण सर्वर में कुछ दिक्कतें आती थी, मगर वर्तमान में सर्वर बेहतर ढंग से चल रहा है। पहले ?किसानों को अपनी जमीन का हर एक खसरा नंबर अपलोड करना पड़ता था, जिससे सीएचसी संचालकों को भी दिक्कतें होती थी, मगर नए साफ्टवेयर में भी कुछ बदलाव किए हैं। अब तक लगभग 48 हजार से अधिक किसानों की आईडी जनरेट की जा चुकी है।
सभी किसान की आईडी बनेगी खेत समेत पूरी जानकारी होगी हर किसान का रजिस्ट्री कराने के बाद आईडी बनना है। इस आईडी में किसान की संपूर्ण जानकारी रहेगी, जिससे किसान को समर्थन मूल्य धान बेचना हो, पीएम सम्मान निधि का पैसा पाना हो, फसल बीमा कराने, किसान क्रेडिट कार्ड के अलावा अन्य सरकारी लोन सहित संबद्ध विभागों की सभी तरह के किसानों से संबंधित योजना का लाभ मिलेगा। यदि कोई किसान फार्मर रजिस्टर नहीं करवाता है तो कई महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित हो सकता है। वहीं ऋण पुस्तिका में दर्ज सभी व्यक्ति का अलग-अलग पंजीयन कराना होगा।



















