
कोरबा। आदिवासी बाहुल्य कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत दमहामुड़ा में केरल की मिशनरी संस्था के द्वारा वर्मा सतनामी से जमीन की खरीदी की गई है। नामांतरण से पहले इस मामले में तकरार शुरू हो गई है। जनजातीय समाज ने इसे लेकर विरोध दर्ज कराया है। उच्च स्तर पर इस बारे में अवगत कराया गया है।
खबर के अनुसार पटवारी हल्का नं.-17 राजस्व निरीक्षक मंडल कोरबी के ग्राम दमहामुड़ा में विलिवर्स चर्च ऑफ इंडिया द्वारा बिशप डॉ. शामुएल मैथ्यू पिता श्री मैथ्यू निवासी कैथप्पाटालीन तहसील तिरुवल्ला जिला पत्तन्नम्थिट्टा केरल के द्वारा चर्च निर्माण के उद्देश्य से जमीन खरीदी गई है। संबंधित जमीन धनंजय कुमार वर्मा पिता रामलाल वर्मा जाति सतनामनी निवासी मंगला बिलासपुर जिला बिलासपुर की बताई गई है, जो दमहामुड़ा के खसरा नं. 143/3 में स्थित है और इसका रकबा 0.243 हे. है। बताया गया कि आवेदित भूमि को रजिस्टर्ड बैनामा के आधार पर अनावेदकगण राजलाल पिता भंजु वगैरह से दिनांक 4.5.2016 के आधार पर विलिवर्स चर्च ऑफ इंडिया के नाम पर क्रय किया गया है। आवेदक ने उक्त भूमि को छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 109, 110 के तहत नामांतरण के लिए मामला नायब तहसीलदार कोर्ट में लगाया है। जानकारी मिली कि जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र में संबंधित जमीन की उपयोगिता विशिष्ट कार्य के लिए होने का पता चलने पर जनजातीय समाज ने विरोध शुरू कर दिया। दमहामुड़ा के सरपंच सहित यहां के 50 से अधिक लोगों व आसपास के कुछ और ग्रामीणों ने प्रशासनिक कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराई। इसमें कुछ राजनीतिक दल भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न सामाजिक संगठनों को भी इस इलाके में चर्च निर्माण के लिए जमीन की खरीदी पर ऐतराज है। नायब तहसीलदार के यहां इस मामले में सुनवाई के लिए लोग चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी कीमत पर हम अपने क्षेत्र में ऐसे किसी गतिविधि को नहीं होने देंगे।
आदिवासी संस्कृति पर आघात : मरकाम
जनजातीय संस्कृति और अन्य संबंधित मामलों के लिए बड़े क्षेत्र में काम कर रहे कार्यकर्ता वीएन मरकाम ने पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड में चल रही इस तरह की हरकतों पर घोर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आदिवासियों की संस्कृति और परंपरा पर आघात करने के लिए जमीन खरीदी की जानी घोर आपत्तिजनक है। उनका कहना है कि जिस इलाके में वन विशेष की उपस्थिति न के बराबर है वहां चर्च का औचित्य क्या? जमीन की खरीदी जिस संस्था के नाम पर की गई है वह अपने आपमें सवाल खड़ी करती है। हमने सरकार के उच्चाधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाई है। समाज भी विचार कर रहा है।


















