जिलाधीश का फरमान बेअसर, अनेक केंद्रों में ढाई लाख क्विंटल धान को मिलर्स का इंतजार

कोरबा। खरीफ सीजन वर्ष 2025-26 में कोरबा जिले में कुल पंजीकृत किसानों से 29 लाख 72 हजार क्विंटल धान का उपार्जन किया गया। 15 नवंबर से 31 जनवरी की अवधि में इस काम को पूरा किया गया। खरीदी से ठीक पहले हाथी समस्या पर न केवल मंथन किया गया बल्कि खरीदी के साथ-साथ धान का उठाव करने के निर्देश प्रशासन ने दिए। इस बीच सुरक्षा के चक्कर में कुदमुरा उपार्जन केंद्र के प्रभारी राजेश राजपूत की हाथी हमले में मौत हो गई। हालात ये है कि जिलाधीश के निर्देश के बाद भी हजारों क्विंटल धान का उठाव अनेक समितियों से नहीं हो सका है।
जिले में 49 समितियों के अंतर्गत 65 उपार्जन केंद्र बनाए गए जहां पर संबंधित गांवों के किसानों का पंजीकरण किया गया। गिरदावरी और रकबा सत्यापन के बाद कई प्रकार की अड़चनों के बीच उन्हें अपने उत्पाद को बेचने की सुविधा मिल सकी। इसके बाद चुनौतियों का सामना करते हुए किसानों को उपज का मूल्य मिल सका। दूसरी ओर असली समस्या उपार्जन केंद्रों के सामने बना हुआ है। वहां पर धान का उठाव काफी सुस्त चाल से मार्कफेड करा रहा है। राइस मिलर्स पर न तो डीएमओ के निर्देश का असर हो रहा है और न ही कलेक्टर का। अभी की स्थिति में श्यांग उपार्जन केंद्र में 12हजार क्विंटल, बरपाली में 9 हजार, चिर्रा में 3 हजार क्विंटल धान का उठाव होना बाकी है। वहीं चचिया में एक ट्रिप की मात्रा उठाव के लिए मिलर्स की प्रतीक्षा कर रही है। यही हाल हाथी प्रभावित सिरमिना और कोरबी सहित अन्य उपार्जन केंद्र भी चिंतित है कि उनके यहां धान की बची मात्रा का उठाव आखिर कब तक हो सकेगा। याद रखना होगा कि कलेक्टर ने 10 मार्च तक शत्-प्रतिशत धान का उठाव करने के निर्देश दिए थे। इसके लिए 24 घंटे का समय बचा है। ऐसे में बकाया उठाव हो सकेगा, इस पर संशय है।
2.48 लाख क्विंटल मात्रा जाम
खबर के अनुसार वर्तमान में कोरबा जिले की अनेक समितियों में कुल 2 लाख 48 हजार क्विंटल धान का उठाव होना बाकी है। यह मात्रा कुल खरीदी गई धान के मुकाबले 10 फीसद बताई जा रही है। दावा किया गया कि 90 फीसदी मात्रा का उठाव मिलर्स की ओर से कर दिया गया है।

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