
कोरबा। हाल ही में शासन द्वारा डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध और 5 लाख रुपए के जुर्माने से संबंधित नए कानून के विरोध में आज डिस्ट्रिक्ट साउंड एंड लाइट असोसिएशन कोरबा के सदस्यों ने एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य इन कड़े नियमों पर चर्चा करना और भविष्य की रणनीति तय करना था।
एसोसिएशन के सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वे जल्द ही जिला प्रशासन के साथ एक बैठक करेंगे और उनसे सशर्त नियमों के साथ डीजे चलाने की अनुमति देने का निवेदन करेंगे। सदस्यों का कहना है कि वे प्रशासन द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करने को तैयार हैं, बशर्ते उन्हें शांतिपूर्वक अपना व्यापार करने का मौका दिया जाए। यदि प्रशासन उनकी मांग को स्वीकार नहीं करता है और डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध जारी रहता है, तो एसोसिएशन ने अपने व्यापार को पूरी तरह से बंद करने की शपथ ली है। बैठक में सदस्यों ने डीजे को लेकर लागू किए गए नियमों में भेदभाव का आरोप लगाते हुए अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना था कि ये नियम अक्सर पूजा-पाठ और त्योहारों के दौरान ही सख्ती से लागू होते हैं, जबकि स्वतंत्रता दिवस या अन्य राजनीतिक आयोजनों जैसे शासकीय कार्यों के दौरान इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
एसोसिएशन के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर नियम का पालन करना ही है, तो प्रशासन को सभी को एक ही तराजू में तौलना चाहिए। अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग नियम नहीं होने चाहिए। उन्होंने कटघोरा में हाल ही में एक बड़े साउंड सेटअप का उदाहरण भी दिया, जहां पुलिस प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह दर्शाता है कि धनाढ्य वर्ग के आयोजनों में नियमों की अनदेखी की जाती है।
एसोसिएशन ने डीजे उपकरण जब्त करने के नियम पर भी कड़ी आपत्ति जताई। सदस्यों ने तर्क दिया कि यह एक अजीब और अन्यायपूर्ण नियम है। उन्होंने इसकी तुलना शराब के मामले से करते हुए कहा, शराब पीने वाले पर जुर्माना लगाया जाता है, शराब को जब्त नहीं किया जाता। लेकिन डीजे के मामले में डीजे बुक करने वाले पर नहीं, बल्कि डीजे पर ही कार्रवाई होती है और उसे जब्त कर लिया जाता है।
उनका कहना है कि नियम के अनुसार, डीजे बुक करने वाले पर कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि उसने नियम का उल्लंघन किया है। डीजे वाले तो सिर्फ अपनी सेवा दे रहे हैं। सदस्यों ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि अगर सरकार को राजस्व चाहिए, तो वह डीजे वालों से भी ले सकती है, लेकिन उन्हें शांति से अपना व्यापार करने दिया जाए। बैठक के बाद, एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन तैयार किया है, जिसे जल्द ही जिला प्रशासन को सौंपा जाएगा। सदस्यों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को समझेगा और एक ऐसा समाधान निकालेगा जिससे सभी को न्याय मिल सके।