
कोरबा । कोरबा अंचल के निहारिका क्षेत्र कोसाबाड़ी में कृष्णा और एनकेएच अस्पताल जाने का रास्ता इतना खराब है, कि मरीजों की जान आफत में पड़ जाती है। मेन रोड से महज 150 मीटर सडक़ पर गड्ढों के चलते मरीज हिचकोले खाने को मजबूर है। नगर निगम ने सडक़ बनाने 3 साल पहले 50 लाख रुपए का टेंडर जारी किया था। टेंडर निजी कॉलोनी बताकर निरस्त कर दिया गया। अब कॉलोनी प्रबंधन इसे निगम को हैंडओवर करने की बात कह रहा है।
मंगलम विहार कॉलोनी में कृष्णा हॉस्पिटल और इसके बाद न्यू कोरबा हॉस्पिटल का संचालन हो रहा है। यहां 10 परिवार भी रहते हैं। कॉलोनी में 2007 में प्लॉट की बिक्री हुई थी। मेन रोड से कॉलोनी जाने गेट लगा था। कॉलोनी में कच्ची सडक़ ही थी। चिकित्सालय बनने के बाद इस रोड पर चहल-पहल बढ़ गई, लेकिन सडक़ पक्की नहीं हो पाई। इस कच्ची सडक़ पर 100 से अधिक गड्ढे हैं। इसी से होकर रोजाना मरीजों को अस्पताल पहुंचना होता है। सडक़ पर हिचकोले खाने से मरीजों की जान पर बन आती है।
बताया जा रहा हैं की गंभीर मरीजों के लिए यह सडक़ किसी खतरे से कम नहीं है। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि नगर निगम को टैक्स देने के बाद भी सुविधाएं नहीं मिल रही है। कृष्णा हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. विशाल उपाध्याय का कहना है कि सडक़ खराब होने से सभी को परेशानी हो रही है। निगम सडक़ नहीं बनाती है, तो मरीजों और लोगों की समस्या को देखते हुए मैंने खुद ही सडक़ बनवाने का निर्णय लिया है। मंगलम विहार प्रबंधन ने कहा कि कॉलोनी बनाने में निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियम-शर्तों का पालन किया है। सडक़-नाली भी बनाई गई थी। इसके बाद निगम को हैंडओवर कर दिया गया। 2009 में निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने सर्टिफिकेट भी दिया है। आश्रय शुल्क भी जमा है। निगम ने अनुज्ञा राशि 10 लाख रुपए वापस की है। कॉलोनी से निगम को हर साल करीब 5 से 6 लाख रुपए प्रॉपर्टी टैक्स मिलता है। इसलिए कॉलोनी के लोग निगम से सडक़ बनाने की मांग कर रहे हैं। चिकित्सालय से ही सबसे अधिक टैक्स जमा होता है। इसके बाद भी जमीन को निजी बताकर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। मेन रोड से चिकित्सालय के बीच करीब 20 मीटर निजी जमीन होना बताया जा रहा है। यहां डब्ल्यूबीएम सडक़ है। सडक़ बनाने में यह भी विवाद का कारण था। कई लोगों ने निजी कॉलोनी में सडक़ बनाने का विरोध किया था। इसके बाद निगम सडक़ बनाने से पीछे हट गया। कॉलोनी के पीछे भी गेट है, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो रहा है। नगर निगम कोसाबाड़ी जोन कमिश्नर भूषण उरांव का कहना है कि निजी कॉलोनी होने से सडक़ नहीं बनी। इसके लिए टेंडर भी हो चुका था, बाद में निरस्त किया गया। कॉलोनी हैंडओवर होने की जानकारी नहीं है।न्यू कोरबा हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. एस. चंदानी ने कहा निगम को सडक़ बनाने कई बार पत्र लिख चुके हैं। हर साल प्रॉपर्टी टैक्स भी जमा कर रहे हैं। इसके बाद सडक़ नहीं बनाई जा रही है। निगम प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।


























