
कोरबा। कोरबा जिले के साहित्यकार और नाट्य निदेशक घनश्याम श्रीवास ने राजभाषा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में भागीदारी की। उन्होंने छतीसगढी में-छतीसगढी भाखा जी संगी,सबे के हिरदे मा समावत है, को प्रस्तुत किया। सभी वरिष्ठ साहित्यकारो ने घनश्याम श्रीवास की रचना की सराहना की।
छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग द्वारा राजधानी में छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाया गया। छत्तीसगढ़ राज्य में छत्तीसगढ़ी भाषा क्यों जरूरी है इस विषय पर गंभीरता पूर्वक चर्चा किया गया। कोरबा जिले से घनश्याम श्रीवास यहां पर आमंत्रित किए गए थे। वे चार दशक से साहित्य की विभिन्न विधाओं में काम कर रहे हैं। उन्होंने इस कार्यक्रम में अपना कौशल दिखाया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजेश अग्रवाल संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री छत्तीसगढ़ शासन,विशिष्ट अतिथि बृजमोहन अग्रवाल सांसद रायपुर लोकसभा क्षेत्र, अतिथि पुरंदर मिश्रा विधायक रायपुर उत्तर, अनुज शर्मा विधायक धरसीवा, डॉ. रोहित यादव सचिव छत्तीसगढ़ शासन संस्कृति विभाग की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में चर्चा गोष्ठी के अंतर्गत पुरखा के सुरता जिसमें स्वर्गीय सुरजीत नवदीप के जीवन के ऊपर रामेश्वर वैष्णव वरिष्ठ साहित्यकार छत्तीसगढ़ रायपुर तथा चंद्रशेखर शर्मा धमतरी ने अपनी बात रखी,तथा दूसरे क्रम में स्वर्गीय केदार कश्यप जी के जीवन पर श्रीमती प्रतिष्ठा सिंह मुंगेली से तथा आर. एन. राजपूत बिलासपुर से अपनी बात रखी। राज्य स्तरीय इस विशाल कार्यक्रम में कोरबा जिले के वरिष्ठ गीतकार, गजलकार,नाट्य निर्देशक व रंगकर्मी घनश्याम श्रीवास विगत 40 वर्षों से लगातार कार्य कर रहें। इस हेतु इन्हें अनेकों सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है जो कोरबा जिले के साथ छतीसगढ राज्य के लिए गौरव की बात है।छतीसगढ महतारी संस्कृति संवर्धन सेवा समिति छतीसगढ़ के सांस्कृतिक सचिव भी हैं।
















