
यार्ड समझ कंडम गाडिय़ों को रख भूल गए मालिक, व्यवस्था बाधित
कोरबा। नगर का डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी बस स्टैंड बनाया तो यात्रियों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स की सुविधाओं के लिए है लेकिन यहां पर समस्याओं का बोलबाला कुछ ज्यादा है। अरसे से कई प्रकार की परेशानियां व्यवस्थाओं को बाधित करने का कारण बनी हुई है। प्रशासन, नगर निगम और परिवहन विभाग की जानकारी में तमाम चीज हैं लेकिन समाधान के रास्ते कहीं से नहीं है। मौके पर ठेला गुमटियों की अतिक्रमण के कारण परेशानियां ज्यादा है।
विभाजित मध्य प्रदेश के समय कोरबा में विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण काम कर रहा था, तब डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से यहां पर बस स्टैंड और यात्री प्रतीक्षालय की बेहतर व्यवस्था की गई। मध्य प्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसें यहां से संचालित होती रही। वर्तमान स्थिति में छत्तीसगढ़ सहित बिहार, झारखंड, उड़ीसा और दक्षिण छत्तीसगढ़ के सीमांत क्षेत्र के लिए यात्री बसों का संचालन यहां से हो रहा है। इनकी संख्या 80 के आसपास बताई जाती है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस व्यवसाय से सैकड़ो परिवारों के जीविका निर्धारित होती है जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इस व्यवसाय का हिस्सा है।
कोरबा के इस बस स्टैंड को देखने से एक बार भी ऐसा लगता है कि इसकी संरचना किसी मुख्य मार्ग पर कर दी गई है। दुपहिया चार पहिया से लेकर अधिक सभी प्रकार की गाडिय़ों का परिचालन दिनभर होने से तस्वीर कुछ ऐसी दिखाई देती है। ऊपर से बस स्टैंड के बड़े हिस्से में ठेले गुमटियों की बहार है। इस वजह से समस्याओं में बढ़ोतरी हो रही है। जहां-था ऐसे नमूने होने के कारण बसों को निकालने में स्टाफ को दिक्कतों से 2-4 होना पड़ता है। बस स्टैंड में कंडोम गाडिय़ों की लंबे समय से उपस्थिति भी यहां की व्यवस्था को प्रभावित करने में अपनी भूमिका निभा रही है। हालात ऐसे हैं कि लंबे अरसे से कई ब्रेकडाउन गाडिय़ों को यहां पर खड़ा कर दिया गया है। कहना गलत नहीं होगा कि संबंधित वाहन मालिकों ने नगर निगम के इस बस स्टैंड को अपना निजी यार्ड समझ रखा है और वह भरपूर दुरुपयोग करने में लगे हुए। ना तो ऐसी गाडिय़ों को मौके से हटाने में अधिकारी रुचि ले रहे हैं और ना ही इन्हें अपने कब्जे में लिया जा रहा है।
पर्याप्त नहीं प्रकाश और पानी की व्यवस्था
कोरबा के इस बस स्टैंड से रोजाना हजारों की संख्या में यात्रियों का आना जाना अलग-अलग मार्गों पर होता है। इस लिहाज से बुनियादी सुविधाओं की कमी साफ बनी हुई है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोगों ने बताया कि यात्रियों को यहां वहां से पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। बार-बार ध्यान आकर्षण के बाद भी मसले जस की तस है।
हर रोज निकलती है शराब की बोतलें
अराजक तत्वों के लिए बस स्टैंड के यात्री प्रतीक्षालय वाला हिस्सा शाम ढलने के बाद अपनी जरूरत बन जाता है। खबर के अनुसार यहां रात में जमकर शराबखोरी होती है। प्रमाण इस बात से मिलता है कि हर सुबह लगभग एक बोरी भर के शराब की खाली बोतल है यहां के अलग-अलग हिस्से से प्राप्त होती हैं। कबाड़ बीनने वाले लंबे समय से इस तरह की बोतलों को इक_ा करने के साथ मजबूत हो रहे हैं।
दावा नही, काम करें अधिकारी
बस स्टैंड की व्यवस्था से जुड़े हुए लोगों का कहना है कि स्वच्छता से लेकर दूसरे मामलों में बड़े-बड़े दावे जरूर किया जा रहे हैं लेकिन यहां पर जिस तरह की तस्वीर है, वह अलग कहानी कहती है। हमने स्थानीय समस्या को लेकर मौखिक और लिखित रूप से अधिकारियों को अवगत कराया है। हम लगातार कार्यवाही का इंतजार कर रहे हैं लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं रहा है। हम चाहते हैं की दावा से कहीं ज्यादा काम होना चाहिए।


















