लच्छीबंध तालाब में स्थगन आदेश के बाद भी अतिक्रमण जारी

चांपा। तहसीलदार न्यायालय के स्थगन के बाट भी लच्छीबंध तालाब को पाटकर निर्माण किया जाना बदस्तूर जारी है। प्रशासन को ध्यान आकर्षण कराते हुए आदेश का उल्लघंन करने वानों पर कार्यवाही की मांग की गई है।
लच्छीबंध तालाब को बचाने का संघर्ष को डेढ़ दशक से भी ज्यादा हो रहा है। करीब 17 वर्ष पूर्व लच्छीबंध तालाब घाट में बने हाते की कुछ दीवाल को तोड़े जाने के बाद राखड़ डालकर तालाब को पाटने की खबर से लोग आंदोलित हो उठे थे। धरना प्रदर्शन के बीच तत्कालीन तहसील न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश दिये जाने व तत्कालिक एसडीएम व तहसीलदार द्वारा प्रशासन की ओर आंदोलनकारियों को आश्वासन दिये जाने के बाद आंदोलन वापस लिया गया था। तब से आज तक पर्यावरण प्रेमियों द्वारा तालाब को बचाने संघर्ष बदस्तूर जारी है। उस समय तालाब पुलिस थाने के सामने वाली मुख्यं सडक़ से लगा हुआ था। तालाब के एक ओर शहीद राजकरण दुग्गड उद्यान व सडक़ दुसरी और तालाब के हाते बने हुए तालाब के घाट थे। तालाब व सडक़ के बीच किसी प्रकार का कोई व्यवसायिक प्रतिष्ठान या मकान, दुकाने नहीं थी। बाद में लोगो द्वारा फुटपाती दुकान लगाने, फिर धीरे से घेरा बंदी करने, फिर पीछे से तालाब को पाट कर काप्लेक्स भवन बना लेने का षड्यंत्र चलता रहा। समय समय पर प्रशासन का ध्यान आकर्षण करते हुए शिकायत होता रहा है। अब पुन: पर्यावरण प्रेमी रविन्द्र कुमार मासुलकर द्वारा लिखित शिकायत की गई। जिस पर तहसीलदार चांपा द्वारा पुलिस को आदेश जारी कर उचित कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है। उच्च अधिकारी व निम्न अधिकारी के बीच निर्देश पर निर्देश दिया जा रहा है लेकिन धरातल पर कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है। तालाब को बचाने की मुहिम मे पूर्व से जुड़े गिरधारी यादव व साथियों की मांग को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम चांपा द्वारा सीएमओ चांपा को फोन लगाकर तालाब पर अवैध निर्माण कार्य पर संबंधित दुकान निर्माण कर्ताओं को नोटिस जारी करने के लिए कहा गया है। इसी कड़ी में तहसीलदार द्वारा पुलिस को निर्देश दिया गया है। तहसीलदार द्वारा पुलिस को निर्देश दिया गया है।

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