श्रम का सम्मान या बोझ का अंत, क्या मई दिवस से पहले मिलेगा मृत हमाल के परिवार को बीमा क्लेम

उदासीन रवैया बना है मार्कफेड का
कोरबा। एक सप्ताह बाद मई दिवस है। इस मौके पर श्रमिकों के हित के संरक्षण और अधिकारों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाएंगे और उनकी शान में कसीदे पढ़े जाएंगे। इससे पहले श्याम सिंह कंवर नामक श्रमिक की जिंदगी तब खत्म हो गई जब काम के दौरान उसके उपर धान की कई बोरियां आ गिरी। सरकार की योजना के तहत उसका बीमा था। हैरानी की बात यह है कि मृत कर्मी के परिवार को बीमा राशि दिलाने के मामले में मार्कफेड उदासीन है। ऐसे में श्रमिक हितों की तरफदारी और न्याय के दावे हवा-हवाई से ज्यादा कुछ नहीं लगते।
सुशासन तिहार में भी यह मामला सामने आया, फिर भी हुआ कुछ नहीं। कोरबा जिले की बरपाली धान उपार्जन केंद्र में श्याम सिंह कंवर श्रम साध्य कार्य करता था। 27 जनवरी को इस दौरान 20 से अधिक बोरियां उस पर आ गिरी। दबाव से उसकी स्थिति नाजुक हो गई। फौरी तौर पर उसे चांपा के निजी अस्पताल ले जाया गया लेकिन बाद में उसे नहीं बचाया जा सका। खबर के अनुसार श्याम की मौत ने उसके परिवार के सामने सामाजिक संरक्षण से लेकर आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर दी है। पता चला कि धान उपार्जन व्यवस्था में लगे प्रबंधक, ऑपरेटर से लेकर सभी श्रमिकों का बीमा सरकार कराती है। इसमें अंतिम रूप से क्लेम की जवाबदेही मार्कफेड की होती है। हमारे संवाददाता ने बताया कि बरपाली उपार्जन केंद्र के हमाल श्याम सिंह की मृत्यु होने पर स्थानीय स्तर पर उसके परिवार को आर्थिक सहायता दिलाई गई। डेढ़ लाख से अधिक राशि पहले ही उसके उपचार पर परिवार खर्च कर चुका था। पता चला कि योजना के अंतर्गत बीमा के क्लेम से संबंधी औपचारिक कार्यवाही जिला सहकारी बैंक की ओर से मार्च महीने तक कर दी गई और इसी दौरान दूसरी बार स्मरण पत्र मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारी को कराया गया। हैरानी की बात यह है कि लगातार दो पत्र देने के बाद भी मार्कफेड नींद में है। उपचार में खर्च हुई पूरी राशि और बीमा पॉलिसी क्लेम दिलाने को लेकर उसकी ओर से किसी प्रकार की गंभीरता नहीं दिखाई जा रही, समझ से परे है।
सरकार को देना होगा ध्यान
याद रहे कोरबा जिला औद्योगिक प्रधान है और यहां पर श्रमिकों की बाहुल्यता है। विष्णुदेव साय की सरकार गांव, गरीब, किसान और श्रमिकों की बात करते नहीं अघाती। ऐसे में जनजाति परिवार से वास्ता रखने वाले श्याम सिंह की मौत के बाद उसके परिवार का हालचाल जानना सरकार का दायित्व बन जाता है। मामले में आवश्यक कार्यवाही की अपेक्षा करना स्वाभाविक है।
जरूर करेंगे पहल
धान उपार्जन केंद्र बरपाली में धान की बोरियां गिरने से श्याम सिंह कंवर नामक हमाल की मौत उपचार के दौरान होने की जानकारी आपके माध्यम से प्राप्त हुई है। सरकारी योजना के तहत श्रमिक का बीमा था। उसके परिवार को क्लेम का लाभ मिलना चाहिए। प्रकरण को दिखवाने के साथ जरूरी पहल की जाएगी।
लखनलाल देवांगन, श्रम मंत्री, छ.ग.
प्रक्रियाएं तय हैं
काम के दौरान मजदूरों के साथ होने वाली घटनाएं और नियमानुसार बीमा पॉलिसी लिए जाने की स्थिति में उसके क्लेम के मामले में प्रक्रियाएं तय है। मृतक हमाल के परिवार को क्लेम करना होगा। अगर क्लेम किया जा चुका है तो समाधान के लिए उचित प्लेटफार्म है। हम सीधे प्रकरण हस्तक्षेप नहीं करते हैं।
राजेश आदिले, एएलसी कोरबा

RO No. 13467/10