
जगदलपुर। तेलंगाना के हैदराबाद में शनिवार को 130 माओवादियों ने 124 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया। यह घटना दंडकारण्य के जंगलों में दशकों से गूंज रही बंदूकों की आवाज को कमजोर होने का संकेत देती है। समर्पण करने वालों में 42 सदस्य कुख्यात हिंसक हिड़मा की बटालियन के बताए जा रहे हैं। इस समर्पण के साथ ही झीरम, ताड़मेटला और बुर्कापाल जैसे बड़े हमलों के लिए जिम्मेदार माओवादियों के शीर्ष हिंसक दल पीएलजीए (पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) का खात्मा हो गया है।
पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षाबलों के लगातार अभियानों और मजबूत खुफिया तंत्र के कारण माओवादी ढांचा न केवल संगठनात्मक बल्कि मानसिक रूप से भी कमजोर हुआ है। कभी जंगलों में भय और वर्चस्व का माहौल बनाने वाले माओवादी अब खुद दबाव और असुरक्षा के घेरे में दिखाई दे रहे हैं।
यही कारण है कि एक के बाद एक शीर्ष माओवादी हिंसक हथियार छोड़कर मुख्यधारा की ओर लौटने पर मजबूर हो रहे हैं। हाल ही में माओवादियों के केंद्रीय हिंसक दल प्रमुख थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी का समर्पण भी इसी बदलाव का हिस्सा है।
माओवादियों के कैडरों को इस तरह प्रशिक्षित किया जाता रहा है कि वे मरने को तैयार रहते हैं, लेकिन हथियार डालने को नहीं। पिछले वर्ष अक्टूबर में जब कुख्यात माओवादी हिंसक मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने समर्पण किया, तब संगठन के सदस्यों ने उन्हें गद्दार तक कह दिया था। लेकिन, अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं।






























