
सक्ती। शहर के बीचों-बीच हुई लूट की एक वारदात को सात महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। कार्रवाई में हो रही देरी से परेशान पीडि़त परिवार ने अब पुलिस सक्ती अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर से गुहार लगाई है, जिसके बाद मामले में जांच की सुगबुगाहट तेज होने की उम्मीद है।बात दे बीती 5 सितंबर 2025 को वार्ड नंबर 15 की निवासी श्रीमती सरोज देवी अग्रवाल अपने किसी परिचित से मिलने जा रही थीं।
इसी दौरान उनके घर के पास वाली गली में ही दो अज्ञात बाइक सवार युवकों ने उनके गले से सोने की चैन झपट ली और रफूचक्कर हो गए। दिनदहाड़े हुई इस घटना से पूरे नगर में दहशत फैल गई थी। घटना के तत्काल बाद सक्ती थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।अब पीडि़त परिवार का आरोप है कि बीते सात महीनों में वे दर्जनों बार थाने के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन ही मिला। परिवारजनों का कहना है कि पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण अपराधी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं।
एसपी के निर्देश पर एसडीओपी को सौंपी गई कमान
अब जब श्रीमती सरोज गर्ग के परिजनों ने सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर से मुलाकात कर अपनी व्यथा सुनाई, तो मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के पुलिस अधीक्षक ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस पुराने मामले का निपटारा करने के लिए इसकी जिम्मेदारी तत्काल अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (स्ष्ठह्रक्क) को सौंप दी है। बड़ा सवाल यह है की क्या सात महीने पुराने इस मामले में पुलिस अब कोई ठोस सुराग जुटा पाएगी।
नगरवासियों की नजरें अब अनुविभागीय पुलिस अधिकारी की कार्रवाई पर टिकी हैं।

























