
पटना 19 मार्च। राजधानी को स्मार्ट और रोशन बनाने के दावे कागजों तक सिमटते नजर आ रहे हैं। नगर निगम हर साल स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन शहर की मुख्य सडक़ें अब भी अंधेरे में डूबी हैं। करीब 82 हजार स्ट्रीट लाइटें लगी होने के बावजूद व्यस्त इलाकों में इनका संचालन प्रभावी नहीं है। शहर की लाइफ लाइन माने जाने वाले अटल पथ की स्थिति सबसे खराब है। निगम के आंकड़ों के अनुसार यहां करीब 457 स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात में तेज रफ्तार वाहनों के बीच हादसे का खतरा बढ़ गया है। अटल पथ के अलावा कंकड़बाग, कदमकुआं और आशियाना-दीघा रोड जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी कई पोल पर लाइटें लगी हैं, लेकिन वे जलती नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही सडक़ें अंधेरे में डूब जाती हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्ट्रीट लाइट मद में 41 करोड़ रुपये से अधिक और 2025-26 में अब तक 26 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं, फिर भी जमीनी स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है। शिकायतों के निपटारे की रफ्तार भी धीमी है। निगम के काम्बैट सेल में दर्ज 1432 शिकायतों में से 330 लंबित हैं, जबकि वाट्सएप चैटबाट पर आई 3970 शिकायतों में 127 का निपटारा अभी बाकी है।
करोड़ों खर्च और तकनीकी दावों के बीच प्रमुख सडक़ों का अंधेरे में रहना निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। समय रहते सुधार नहीं हुआ तो मानसून में जलजमाव के साथ अंधेरे की समस्या और गंभीर हो सकती है।बताया जाता है कि वर्ष 2020 के आसपास शहर में स्ट्रीट लाइटों का सर्वे कराया गया था। अब नए वित्तीय वर्ष में एक बार फिर सर्वे कराया जाएगा, जिसमें खास तौर पर नए विकसित इलाकों पर फोकस रहेगा। नगर आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, शहर में आईओटी आधारित आधुनिक स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी। ये सेंसर आधारित लाइटें शाम होते ही स्वत: जलेंगी और सुबह होने पर खुद बंद हो जाएंगी। इसके लिए एक कमांड सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, जिससे बिजली की खपत में कमी आएगी।























