कोरबा। मातनहेलिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के प्रथम दिन पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि भगवत गीता वह ग्रंथ है, जिसमें जीवन का गुर छुपा हुआ है। भगवत कथा सुनने से न पाप धुलता है और न ही पूण्य मिलता है, हमारा आज सुधरता है। पाप-पूण्य तो कर्म पर अधारित होते हैं। हम जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही पाप और पूण्य मिलेगा। उन्होंने प्रथम दिन भागवत गीता का जीवन में महत्व प्रहसन पर जीवन प्रबंधन के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि भगवत कथा सुनने से पहले प्रत्येक श्रोता को इन 5 बातों को करना आवश्यक है। भरोसा से कथा सुनें, कथा सुनने की ललक हो, शिकायत चित्त को विराम दीजिए, मौन रहें एवं संकल्प लें। भागवत कथा सुनने से जीवन में बदलाव दिखना चाहिए, यही कथा की सार्थकता है।
सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: अर्थात भगवान श्रीकृष्ण जो सच्चिदानंद हैं, वे सत्य, चेतना एवं आनंद स्वरूप हैं, हम नमन करते हैं। ये वही भगवान हैं, जो तीन प्रकार के तापों आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक का नाश करने में सक्षम हैं। पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि यह गीता का प्रथम श्लोक है और रोजाना इस मंत्र का जाप करने से चिंताएं और परेशानियां कम होती है और यह मंत्र प्राकृतिक आपदाओं से भी रक्षा करता है।
भगवत कथा के प्रथम दिन पंडित विजय शंकर मेहता ने उपस्थित श्रोतागणों को भगवत महात्म्य का वर्णन किया और कहा कि जीवन धर्म के बिना अधूरा है। उन्होंने कहा यदि जीवन धर्म से नहीं जुड़ा, तो दिखावे का कोई मतलब नहीं। भागवत का अर्थ है-भक्ति, ज्ञान, वैराग्य एवं त्याग। गीता ग्रंथों का सार है और जीवन का व्यवहार भी। उन्होंने कहा कि आज परिश्रम का विशेष महत्व है। सामाजिक जीवन में पारदर्शिता जरूरी है। पारिवारिक जीवन में प्रेम, करूणा, दया और संवेदना जरूरी है। निजी जीवन में पवित्रता जरूरी है। दाम्पत्य जीवन में सम्य और संतुष्टि जरूरी है। पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि मनुष्य के जीवन में अशांति के कई कारण हैं। सम्पत्ति, संबंध, स्वास्थ्य एवं संतान अशांति के कारण हैं। सम्पत्ति, संबंध (पारिवारिक रिश्ता), स्वास्थ्य की चुनौति से आप बाहर निकल जाएंगे, लेकिन संतान की अशांति के कारणों से आप निकल नहीं पाएंगे। संतान प्राप्ति और संतान सुख प्राप्ति अलग-अलग हैं। आप ऐसा संस्कार डालें कि संतान सुख प्राप्त हो। ये सब कारण अशांति के नगण्य हैं, आप स्वयं सबसे बड़े अशांति के कारण हैं और इसके लिए आप स्वयं को बदलें। भगवत गीता का अध्ययन और श्रवण जीवन में बदलाव लाने का दूसरा नाम है। आज की कथा सुनने जश्न रिसोर्ट में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
पंडित विजय शंकर मेहता कथा के दूसरे दिन 25 अगस्त को कपिल गीता, शिव-सती चरित्र एवं भरत चरित्र पर संगीतमय व्याख्यान देंगे।
आयोजक परिवार ने कथा में कोरबावासियों को सादर आमंत्रित किया है और हृदय से विनम्र अपील की है कि प्रथम बार पंडित विजय शंकर मेहता का सानिध्य प्राप्त हुआ है, उनकी दिव्य वाणी से तथ्यपरक जीवन विज्ञान के एक-एक शब्द में जीवन के गुर छिपे हुए हैं। उनके एक-एक शब्द में जीवन में बदलाव लाने की क्षमता दिखाई देता है। गीता के माध्यम से जीवन में सार्थक बदलाव लाना ही जीवन प्रबंधन गुरू पंडित विजय शंकर मेहता का लक्ष्य है।