
कोच्च्,ि २२ जनवरी ।
केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर से जुड़े सोना चोरी मामलों में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि आरोपितों ने संपत्ति की रक्षा के नाम पर मिलकर स्वामी अय्यप्पा की संपत्ति लूटी।इसी आधार पर न्यायालय ने टीडीबी के पूर्व अध्यक्ष ए पद्मकुमार, पूर्व प्रशासनिक अधिकारी बी मुरारी बाबू और कर्नाटक के स्वर्ण व्यापारी आरपी नागा गोवर्धन की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। न्यायमूर्ति ए बदरुद्दीन ने 119 पन्नों के आदेश में कहा कि अभियोजन रिकार्ड से प्रथम ²ष्टया यह स्पष्ट है कि आरोपितों ने देवता की संपत्ति की सुरक्षा का बहाना बनाकर संयुक्त रूप से गबन किया। अदालत ने माना कि इस सोने का प्राचीन मूल्य पैसों में नहीं आंका जा सकता, इसलिए ये अपराध सामान्य मामलों से अलग और जमानत के नियम के अपवाद की श्रेणी में आते हैं। अदालत ने कहा कि मंदिर की संपत्ति की रक्षा के लिए नियुक्त लोग ही जब लुटेरे बन जाएं, तो जमानत पर रिहाई नहीं दी जा सकती।
उन्नीकृष्णन पोट्टी को मिली वैधानिक जमानतइस बीच, कोल्लम की सतर्कता अदालत ने मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी को श्रीकोविल द्वारों से जुड़े मामले में वैधानिक जमानत दी, क्योंकि 90 दिनों में आरोपपत्र दाखिल नहीं हो सका।हालांकि, द्वारपालक मूर्तियों से जुड़े दूसरे मामले में गिरफ्तारी के कारण उनकी जेल से रिहाई नहीं हो पाएगी।उधर, ईडी की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा और बढ़ा है। देवस्वोम बोर्ड से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच की जा रही है। पूरे मामले पर सत्तारूढ़ सीपीआइएम रक्षात्मक मुद्रा में नजर आई और पार्टी सूत्रों ने इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित कार्रवाई बताया।



















