
हरिद्वार, १५ मार्च ।
आमजन को धोखाधड़ी का शिकार बना रहे साइबर ठगों के लिए फर्जी पहचान पर लिए गए सिम कार्ड मजबूत हथियार बन रहे हैं। जांच में बार-बार यह सामने आ रहा है कि ठगी के लिए जिन मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया गया, वे किसी और के दस्तावेजों पर जारी सिम कार्ड होते हैं। इससे न केवल जांच एजेंसियों को असली अपराधियों तक पहुंचने में कठिनाई होती है, बल्कि निर्दोष लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। पुलिस व साइबर सेल के तमाम प्रयास के बावजूद साइबर ठगी की घटनाएं थमने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। ठगी की कई घटनाओं की पड़ताल में सामने आया है कि फर्जी पहचान पर सिम कार्ड जारी कराने का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। कुछ मोबाइल दुकानों पर सही तरीके से केवाईसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता। आरोप है कि बिना आधार या पहचान पत्र का ठीक से सत्यापन किए ही सिम कार्ड एक्टिव कर दिए जाते हैं। कई मामलों में पुराने या किसी अन्य व्यक्ति के दस्तावेजों का दुरुपयोग भी किया जाता है। इस धंधे में कई स्तर पर लोग शामिल हो सकते हैं। सबसे पहले दस्तावेज जुटाने वाले लोग होते हैं, जो किसी तरह से पहचान पत्रों की कापी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद कुछ एजेंट या दुकानदार इन दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी करा देते हैं। फिर इन सिम कार्डों को अपराधियों तक पहुंचा दिया जाता है, जो उनका इस्तेमाल आनलाइन ठगी, फर्जी काल या साइबर अपराधों में करते हैं। साइबर ठग अक्सर ऐसे सिम कार्डों का इस्तेमाल करते हैं ताकि वारदात के बाद उनका पता लगाना मुश्किल हो जाए। कई मामलों में जब पुलिस उस नंबर के आधार पर जांच करती हैं तो दस्तावेज किसी ऐसे व्यक्ति के निकलते हैं, जिसका घटना से कोई लेना-देना नहीं होता।
पुलिस अधिकारी यह कुबूल करते हैं कि फर्जी दस्तावेजों पर जारी सिम कार्ड साइबर अपराधों की जांच में बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। कई बार अपराधी एक बार इस्तेमाल के बाद सिम कार्ड बंद कर देते हैं या फेंक देते हैं, जिससे उनका ट्रैक करना और मुश्किल हो जाता है। पुलिस और प्रशासन इस तरह के मामलों पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी में है। एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि मोबाइल दुकानों की जांच, संदिग्ध सिम कार्डों का सत्यापन और नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन नंबरों की निगरानी भी बढ़ाई जा रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी के मामलों में बार-बार सामने आता है। इसके अलावा आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी व्यक्ति को अपने पहचान पत्र की कापी बिना जरूरत के देने से बचना चाहिए और यह भी समय-समय पर जांचते रहना चाहिए कि उनके दस्तावेजों पर कितने मोबाइल नंबर जारी हैं।

















