अपने उपज की कीमत पाने डेढ़ माह से भटक रहे किसान

जांजगीर-चांपा। समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के भुगतान की समस्या खरीदी सम्पन्न होने के डेढ़ महीने बाद भी खत्म नहीं हो सकी है। अभी भी जिला सहकारी बैंकों में कैश की किल्लत और 25 हजार रुपए की भुगतान लिमिट ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि अंतर की राशि तो दूर समर्थन मूल्य पर बेचे गए धान की राशि का भी पूरा भुगतान नहीं हो सका है। ना केवल शहर इलाकों की शाखाओं में बल्कि जिला मुख्यालय की शाखा में भी किसान भुगतान पाने सुबह से शाम तक कतार में लगे होते है।
राज्य सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर की गई धान खरीदी का भुगतान भले ही किसानों के खाते में आनलाइन कर दी गई है। इतना ही नहीं शासन द्वारा अपने वायदे के मुताबिक अंतर की राशि का भी भुगतान किसानों के खाते में कर दिया गया है, लेकिन जिला सहकारी बैंक के खाते में जमा राशि को आहरण करना किसानों के लिए बेवजह परेशानी का सबब बन गया है। स्थिति यह है कि धान बेचने के शुरूआती दिनों से जिला सहकारी बैंकों में जो कैश की किल्लत हो रही थी, वह आज पर्यन्त दूर नहीं हो सकी है। ऐसे में किसान अपने ही खाते में जमा हुई
राशि को पाने के लिए मशक्कत करने विवश है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में कैश की किल्लत को देखते हुए जहां बैंकों में ग्रामवार सप्ताह में एक दिन भुगतान करने का वादा चुनावी घोषणा पत्र में किया गया था, इसको भी सरकार द्वारा नहीं किया गया, वहीं पूर्व में निर्धारित 25 हजार रुपए का लिमिट अभी तक खत्म नहीं हुआ है। इन बैंकों में बाकायदा एक दो परसेंट देने वाले लोगों 25 हजार से अधिक राशि भुगतान कर रहे हैं। वही किसानों को रकम कम होने का हवाला देते हुए उन्हें बार-बार घुमाया जा रहा है। यह हरकतें केवल जिला मुख्यालय जांजगीर के बैंक में ही नहीं है बल्कि अकलतरा बलौदा पामगढ़ सहित चांपा के भी बैंकों में इसी तरह से कमीशन के आधार पर किसानों को मोटी रकम दी जा रही है वहीं जरूरतमंद किसान जो अपने बच्चों की शादी विवाह करना चाह रहे हैं उन्हें बार-बार बैंक में राशि अधिक नहीं होने का हवाला देते हुए घुमाया जाता है जिसके कारण उनके वैवाहिक कार्यक्रमों की व्यवस्था में अड़चनें उत्पन्न हो रही है। जिला मुख्यालय जांजगीर सहित जिले के अकलतरा, चांपा, बलौदा, शिवरीनारायण, नवागढ़, पामगढ़ जिला सहकारी बैंक में सुबह से शाम तक किसानों की भीड़ लगी होती है।
अंधे अधिकारियों को नहीं दिख रही यह आव्यवस्था
जिमें में वैसे तो अनेक अधिकारी हैं जो खुद को ईमानदारी पुतला समझते हैं तथा छोटी-छोटी बातों पर वे अपने विभागों में चर्चा में रहते हैं। खाने को सभी अधिकारी यहां पदस्थ है किंतु किसने की दशा वे सुधारने में जरा भी रुचि नहीं दिख रहे हैं जिसके कारण इन बैंकों में इनके शाखा प्रबंधकों एवं उनके कर्मचारियों द्वारा किसानों का खुले आम शोषण किया जा रहा है।

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