किसान अब खेती के साथ साथ सौर ऊर्जा से कर सकेंगे दोगुनी आमदनी

नई दिल्ली। दिल्ली को भारत की सोलर कैपिटल बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए दिल्ली सरकार ने कृषि भूमि पर सौर संयंत्र लगाने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने की घोषणा की है। दशकों से चली आ रही लालफीताशाही को समाप्त करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऊंचे सौर सिस्टम लगाने से दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम 1954 का उल्लंघन नहीं होता है। इसके साथ ही हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की आवश्यकता भी समाप्त कर दी है। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने इसे किसानों को साधन संपन्न बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उन्होंने कहा है कि अब दिल्ली का किसान अपनी जमीन पर खेती करेगा और उसी जमीन पर इसी के साथ ही सौर ऊर्जा उत्पन्न कर अपनी आय बढ़ा सकेगा। दरअसल दिल्ली में वर्षों से जटिल भूमि नियमों के कारण सौर ऊर्जा की संभावनाएं सीमित थीं। नए निर्देश के तहत किसान अब अपने खेतों में ऊपर सौर ऊर्जा सयंत्र से सौर ऊर्जा का उत्पादन करते हुए नीचे परंपरागत खेती कर सकेंगे। सूद ने कहा है कि बहुत लंबे समय तक दिल्ली की ऊर्जा क्षमता वर्षों पुराने कानूनी जाल में फंसी रही। कहा कि जब दुनिया केंद्रीयकृत ऊर्जा की ओर बढ़ रही थी तब दिल्ली के किसान ऐसी अनुमतियों का इंतज़ार कर रहे थे जो उनको कभी मिली ही नहीं। उन्होंने कहा कि आज हम ‘नो ऑब्जेक्शन’ की बाधाओं को समाप्त कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि डीडीए , दिल्ली सरकार का विधि विभाग और राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर वर्तमान सरकार ने रिकार्ड समय में कानूनी बाधाओं को दूर किया है, ताकि दिल्ली सबसे आगे रहे।

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