युक्तियुक्तकरण के नियमों की उड़ी धज्जियां

जांजगीर चांपा। जिले में युक्तियुक्तकरण के नियमों से यहां के अधिकारियों ने जमकर खिलवाड़ किया है। अतिशेष चिन्हांकन से लेकर अभ्यावेदनों की सुनवाई में भी मनमानी की गई है। इससे शिक्षकों और उनके परिजनों में व्यापक असंतोष है। महिलाओं को प्राथमिकता देने के बजाय दूर में पदस्थ किया गया है
शिक्षक संवर्ग के अतिशेष चिन्हांकन में कुल 3 विकासखण्ड अकलतरा बलौदा और बम्हनीडीह में अलग नियम एवं नवागढ़ तथा पामगढ़ विकासखण्ड में अलग नियम बनाया गया है, जिले एवं संभाग स्तर पर शासन के नियम का एकरूपता से पालन नहीं किया गया है। संभाग स्तर पर जिले के साथ भेदभाव करते हुए कोरबा, सांरगढ़, मुंगेली के लिए अलग नियम एवं जांजगीर चांपा जिले के लिए समायोजन के संबंध में अलग नियम लागू किया गया है। जिले के मिडिल स्कूलों में 109 पद रिक्त होने के बाद भी जिले के शिक्षकों को अन्य जिले मुंगेली, सांरगढ़ बिलाईगढ़ और बिलासपुर भेजा गया है जहां उन्हें उसी विषय में पदस्थापना दी गई है जो पहले से
जांजगीर-चाम्पा जिले में रिक्त है।अतिशेष सहायक शिक्षक पुरूषों से पैसे का लेनदेन कर उन्हें यथावत शहर के अपने पुराने स्कूल में पदस्थ रखा गया है एवं अतिशेष महिला शिक्षिकाओं को युक्तियुक्तकरण में मूल शाला से 50 कि.मी. दूर भेजा गया है जबकि शासन के प्रावधान में महिलाओं को सुविधा प्रदान की गई है।व्याख्याता संवर्ग में कई विद्यालयों में पद रिक्त नहीं होने के बाद भी कुछ को पैसे का लेनदेन कर यथावत रखा गया है एवं शून्य छात्र संख्या में भी नवीन पदस्थापना दी गई है एवं उसी विषय के अन्य व्याख्याता को भेदभाव करते हुए जिले से बाहर एवं राज्य स्तर पर पदस्थापना दी गई है।जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर एवं विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी नवागढ़ द्वारा महिला शिक्षिकाओं से कई बार दुव्र्यवहार किया गया है एवं उन्हें मानसिक प्रताडना दी जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी जांजगीर एवं बीईओ नवागढ़ न्यायालयीन आदेश को भी नहीं मानते एवं अपनी पहुंच मुख्यमंत्री तक होने का हवाला देते हैं। डीईओ तो इसी जिले से रिटायर होने तक की बात कहते हैं। युक्तियुक्तकरण प्रकिया में निराकरण के लिए शासन द्वारा गठित समिति जिला एवं संभाग स्तर पर शिक्षकों के साथ पिछले एक माह से फुटबाल खेलने जैसा व्यवहार किया जा रहा है। कुछ शिक्षकों को पैसे का लेनदेन कर अभ्यावेदन मान्य किया जा रहा है एवं कुछ का उसी नियम में अमान्य किया जा रहा है। कुछ शिक्षकों को पैसे लेकर उनके मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण भी कराया गया है। जबकि अन्य शिक्षकों का वेतन रोककर प्रताडि़त किया जा रहा है।

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