
काठमांडू। पाकिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के बढ़ते प्रभाव और सरकार के सीमित समर्थन के कारण अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं के लिए अब सवाल समानता का नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व का है। भीड़ द्वारा संचालित न्याय और व्यवस्था की उदासीनता ने हिंदुओं के लिए पाकिस्तान को एक बेहद प्रतिकूल स्थान बना दिया है।
पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बार-बार होती रहती हैं
एक रिपोर्ट में पड़ोसी देश में हिंदू अल्पसंख्यकों की चिंताजनक स्थिति और वहां व्याप्त असहिष्णुता की संस्कृति को प्रमुखता से उजागर किया गया है। सिंध प्रांत में, जहां देश की अधिकांश हिंदू अल्पसंख्यक आबादी रहती है, ईशनिंदा के आरोपों से भड़की सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बार-बार होती रहती हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ये हमले एक समान पैटर्न पर होते हैं, जिसकी शुरुआत एक आरोप से होती है, उसके बाद भीड़ जुटाई जाती है, सांप्रदायिक अशांति फैलती है और अंतत: प्रभावित हिंदू समुदाय को जबरन विस्थापित किया जाता है। नेपाली मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सिंध प्रांत में हाल ही में एक युवा हिंदू किसान की हत्या ने असुरक्षा की भावना को फिर से उजागर किया है। कोहली समुदाय के इस किसान की हत्या एक बाहुबली जमींदार के साथ भूमि विवाद के दौरान दिनदहाड़े गोली मारकर कर दी गई।



















