
कूला, 0३ मार्च ।
आईडीएफसी फस्र्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा से जुड़े कथित 590 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए-नए चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इंफोर्समेंट डायरेक्टर (ईडी) भी पूरे मामले पर कड़ी नजर बनाए हुए है और पूछताछ का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपित नेटवर्क ने बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाते हुए धनराशि को कई चरणों में ट्रांसफर किया, ताकि शक की सुई उन तक न पहुंचे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि कथित घोटाले की रकम से लग्जरी एसयूवी खरीदी गईं और पारिवारिक खर्चों में भी मोटी रकम खर्च की गई।जांच में सामने आया है कि सिंगला फैमिली और रिभव ऋषि ने फर्जी कंपनियां खड़ी कर करोड़ों की हेराफेरी की। धन के प्रवाह को वैध दिखाने के लिए जाली दस्तावेजों और संदिग्ध कॉरपोरेट इकाइयों का सहारा लिया गया। आंतरिक बैंकिंग संपर्कों के जरिए ट्रांजेक्शन को सामान्य रूप देने की कोशिश की गई।
सूत्रों के अनुसार अधिकारियों को फंसाने के लिए लग्जरी गाडिय़ां, कैश और गोल्ड तक बांटे गए। एक सुपरिटेंडेंट को फॉच्र्यूूनर गाड़ी देने और मनीष जिंदल को कैश व गोल्ड पहुंचाने की बात जांच में सामने आई है। आरोप है कि प्रभाव में आने वाले अधिकारियों को उनके रैंक के अनुसार महंगे तोहफे दिए जाते थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बड़े अधिकारियों के लिए गुरुग्राम और हिमाचल प्रदेश के लग्जरी होटलों में प्राइवेट पार्टियां आयोजित की जाती थीं, जबकि छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मोरनी के फार्म हाउस और कालका के होटलों में विशेष इंतजाम किए जाते थे। विकास एवं पंचायत विभाग के सुपरिटेंडेंट नरेश बवानी पर सरकारी सेवा के दौरान करोड़ों रुपये की कथित काली संपत्ति बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में मनीष जिंदल की गिरफ्तारी के बाद घोटाले से जुड़ी कई नई परतें खुलती नजर आ रही हैं।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से तैयार किया गया था। चंडीगढ़ के बड़े रियल एस्टेट निवेशक विक्रम वधवा का नाम भी इस केस में सामने आया है। बताया जा रहा है कि कई आईएएस अधिकारियों की निवेश राशि उसके पास लगी हुई है। मामले में नाम सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों में भी हडक़ंप मचा हुआ है। अब जांच एजेंसियों का फोकस पूरे वित्तीय ट्रेल और डिजिटल फुटप्रिंट पर है। जिन बैंकों में रकम ट्रांसफर हुई, उनसे विस्तृत जानकारी मांगी गई है। अधिकारियों का मानना है कि कई व्यक्तियों और कारपोरेट इकाइयों के माध्यम से रकम घुमाए जाने के कारण पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में समय लग सकता है। इधर बैंक प्रबंधन ने आंतरिक आडिट और सुरक्षा तंत्र को और सख्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच के जरिए पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने की तैयारी है।



















