जांजगीर। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने भारतीय प्रजातान्त्रिक शुद्ध गांधीवादी कृषक दल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने दल को यह नोटिस जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29 के अंतर्गत एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत रहने के औचित्य पर स्पष्टीकरण मांगते हुए भेजा है।
नोटिस के अनुसार, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में यह पाया गया है कि उक्त दल ने वर्ष 2019 से अब तक, यानी पिछले 6 वर्षों में न तो लोकसभा और न ही किसी राज्य विधानसभा या उपचुनाव में कोई भी प्रत्याशी खड़ा किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी ने धारा 29ए के अंतर्गत राजनीतिक दल के रूप में कार्य करना बंद कर दिया है। चुनाव आयोग का मानना है कि पंजीकरण का उद्देश्य केवल उस स्थिति में वैध माना जा सकता है जब दल सक्रिय रूप से चुनावी प्रक्रिया में भाग ले। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत राजनीतिक दल का पंजीकरण, केवल चुनाव आयोग द्वारा आयोजित चुनावों में भागीदारी के लिए ही होता है।
चूंकि दल का वर्तमान पता भी अज्ञात है और पिछले कई वर्षों से उसकी कोई गतिविधि आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुई है, ऐसे में आयोग ने उसे पंजीकृत दलों की सूची से हटाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, अंतिम निर्णय लेने से पहले आयोग ने दल को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। इसके लिए 25 अगस्त 2025 तक आयोग के पास लिखित अभ्यावेदन, अध्यक्ष या महासचिव के हलफनामे सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ जमा करना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, आयोग ने दल के लिए सुनवाई की तिथि 29 अगस्त 2025 निर्धारित की है, जिसमें दल के अध्यक्ष, महासचिव या किसी अधिकृत प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य होगी। यदि तय समय सीमा तक कोई उत्तर या उपस्थिति नहीं होती, तो आयोग इसे दल की ओर से मौन स्वीकृति मानते हुए पार्टी का पंजीकरण रद्द करने का आदेश पारित कर सकता है।