
जांजगीर चांपा। स्थानीय भीमा तालाब के पास गुप्ता परिवार के द्वारा कराई जा रहे हैं देवी भागवत कथा में 7 दिसंबर को भगवान गणेश जन्म तथा जालंधर चरित्र का कथा सुनाया गया जहां हजारों की संख्या महिला एवं पुरुष उपस्थित थे। इस अवसर पर कामता जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री गणेश का जन्म माता पार्वती ने स्नान करने से पहले अपनी उबटन (शरीर के मैल) से एक बालक बनाया और उसमें प्राण फूंक दिए, उसे गणेश नाम दिया गया। माता पार्वती जब स्नान कर रही थी तब उसे बतौर उसे द्वारपाल बनाया। जब शिवजी आए तो गणेश ने उन्हें रोका, दोनों में युद्ध हुआ और क्रोध में शिवजी ने त्रिशूल से उनका सिर काट दिया, तब पार्वती जी के रुष्ट होने पर शिवजी ने उत्तर दिशा से हाथी का सिर लाकर गणेश जी के धड़ पर जोड़ दिया और उन्हें गजानन के रूप में पुनर्जीवित किया। कामता जी महाराज ने कहा कि जब प्रथम देवता पूजने की स्थिति आई तब नारद जी ने उन्हें र बात कर उनका मार्गदर्शन किया और गणेश जी ने शिव जी और पार्वती जी कापरिक्रमा करके प्रथम देव बन गए ।
उन्होंने अपने कथा प्रवचन में कहा कि भगवान शिव के क्रोध से समुद्र से हुआ माना जाता है। वह अत्यंत शक्तिशाली था और उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था। जलंधर की पत्नी वृंदा एक महान पतिव्रता स्त्री थीं। उनके सतीत्व की शक्ति इतनी प्रबल थी कि जब तक वह अपने पति के प्रति समर्पित रहीं और उनकी पूजा करती रहीं, तब तक जलंधर को कोई भी देवता या शक्ति हरा नहीं सकती थी। क्योंकि वे जानते थे कि वृंदा के सतीत्व के कारण जलंधर अजेय है। देवताओं के अनुरोध पर, भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण किया और वृंदा के आश्रम पहुंचे। वृंदा, अपने पति को देखकर प्रसन्न हुईं और उन्होंने उनका स्वागत किया। इस धोखे के कारण, उनका सतीत्व खंडित हो गया, और उसी क्षण युद्ध में जलंधर की मृत्यु हो गई। इस तरह भगवान पापियों का नाश करते रहे हैं।

























