
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे लोगों को जागरूक करना चाहिए, मुआवजा देना चाहिए और उनकी सुरक्षा के लिए प्रयास करना चाहिए, जिन्होंने साइबर धोखाधड़ी में अपनी मेहनत की कमाई गंवा दी है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की जब उन्होंने म्यूल बैंक खातों का निर्माण कर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचने के एक आरोपित परमजीत खरब को जमानत दे दी।
बुजुर्गों की सुरक्षा और मुआवजे के लिए कदम उठाने चाहिए
म्यूल बैंक अकाउंट एक ऐसा अकाउंट होता है जिसका इस्तेमाल साइबर ठग हड़पी गई रकम को ट्रांसफर कराने के लिए करते हैं। जस्टिस नागरत्ना ने अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) एसडी संजय से कहा कि सरकार और पुलिस को कमजोर पीड़ितों विशेषकर बुजुर्गों की सुरक्षा और मुआवजे के लिए कदम उठाने चाहिए।
पीठ ने कहा- ”लोगों को शिक्षित करें। टीवी और रेडियो पर रिकार्डिंग चलाएं कि ये साइबर अपराधी कैसे काम करते हैं। ये मुख्यत: बुजुर्गों को निशाना बनाते हैं।” एएसजी संजय ने कहा कि ये साइबर अपराधी बहुत शातिर होते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने संचार साथी एप लांच किया है, जहां लोग किसी भी साइबर अपराध या चोरी हुए मोबाइल फोन की रिपोर्ट कर सकते हैं।
ये ठग कैसे काम करते हैं?
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा- ”लोगों को दिखाएं कि ये ठग कैसे काम करते हैं। उन्हें साइबर सुरक्षा की शिक्षा दें।” पीठ ने मार्च 2024 से हिरासत में चले रहे आरोपित खरब को यह देखते हुए जमानत दे दी कि अन्य सह आरोपितों को पहले ही राहत दी जा चुकी है। संजय ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपित कई राज्यों में साइबर अपराधों में शामिल है।
खरब के वकील ने कहा कि अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और वह मार्च 17, 2024 से जेल में है। सुप्रीम कोर्ट पहले से ही डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों की सुनवाई कर रहा है, जिसमें हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपती ने साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी का शिकार होने की शिकायत की थी।





























