
वाराणसी 10 फरवरी। एक ओर जहां किसान त्रस्त है, वहीं शासन प्रदेश के कई विशाल कसाईखानों को 35 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान और पांच-पांच करोड़ रुपये तक की नकद सहायता दे रहा है। जिस करदाता के पैसों से गो-रक्षा होनी थी, उसी पैसे से वधशालाओं में संहार की मशीनें लगवाई जा रही हैं। उस केंद्रीय बजट का स्वागत, समर्थन करते हुए ऐतिहासिक बताया जा रहा जिसमें मांस निर्यातकों को पहले से बढ़ाकर की गई तीन प्रतिशत की अतिरिक्त ड्यूटी-फ्री छूट का उपहार दिया गया है। ये आरोप हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के। उन्होंने केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में सोमवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में सवाल उठाया कि क्या जीव-हिंसा को बढ़ावा देने वाला बजट ऐतिहासिक विकास का पैमाना हो सकता है। यह सिद्ध करता है कि शासन की प्राथमिकता धर्ममर्यादा नहीं, बल्कि मांसलमुद्रा है।

























