ब्रिलिएंट पब्लिक स्कूल, में लोहड़ी मकर संक्रांति एवं पोंगल का भव्य आयोजन

जांजगीर चांपा। ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, बनारी, जाँजगीर में संस्था के संचालक आलोक अग्रवाल, डॉ गिरिराज गढ़ेवाल एवं प्राचार्या श्रीमती सोनाली सिंह के निर्देशन में दिनाँक-14 जनवरी 2026 को भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से 13 जनवरी 2026 को लोहड़ी तथा 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति एवं पोंगल पर्व का भव्य एवं रंगारंग आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक आयोजन में विद्यालय परिवार के साथ-साथ छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता का सुंदर संदेश दिया। कार्यक्रम की शुरुआत 13 जनवरी को लोहड़ी पर्व से हुई। लोहड़ी मुख्य रूप से पंजाब और उत्तर भारत का प्रमुख पर्व है, जो फसल कटाई और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का प्रतीक माना जाता है। बच्चों ने लोहड़ी के लोकगीत गाए और पारंपरिक पंजाबी नृत्य भांगड़ा एवं गिद्धा प्रस्तुत कर वातावरण को उल्लासपूर्ण बना दिया। विद्यालय के शिक्षिका श्रीमती मनदीप कौर ने विद्यार्थियों को लोहड़ी के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पर्व किसानों के परिश्रम और प्रकृति के प्रति धन्यवाद ज्ञापन का प्रतीक है। 14 जनवरी 2026 को विद्यालय में मकर संक्रांति एवं पोंगल पर्व का संयुक्त आयोजन किया गया। मकर संक्रांति भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है। यह पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। विद्यालय में इस पर्व को राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कक्षा-तीसरी, चौथीं, सातवीं एवं नवमीं के विद्यार्थियों द्वारा मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया गया। मकर संक्रांति के अवसर पर बाल-वाटिका के विद्यार्थियों ने पतंगबाजी, तिल-गुड़ के महत्व पर आधारित भाषण, कविता पाठ एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। शिक्षकों ने बताया कि तिल-गुड़ आपसी प्रेम, सौहार्द और मधुर संबंधों का प्रतीक है। विद्यालय परिसर में रंग-बिरंगी पतंगों की सजावट की गई, जिसने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। इसी दिन दक्षिण भारत के प्रमुख पर्व पोंगल का भी आयोजन किया गया। पोंगल तमिलनाडु का प्रसिद्ध फसल उत्सव है, जो चार दिनों तक मनाया जाता है और किसानों की समृद्धि एवं प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करता है। विद्यालय में पोंगल पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाया गया। कक्षा-ग्यारहवीं के विद्यार्थियों ने पोंगल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व सूर्य देव, धरती माता और पशुधन के सम्मान का प्रतीक है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का विशेष योगदान रहा। सभी ने मिलकर इस आयोजन को यादगार बनाया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को प्रसाद वितरण किया गया तथा सभी ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएँ दीं। संस्था द्वारा आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि समाज में सांस्कृतिक एकता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का प्रेरणास्रोत भी बना। इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और संस्कृति के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है

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