
नई दिल्ली। कांग्रेस ने रविवार को कहा कि ताजिकिस्तान के ऐनी में भारतीय वायुसैनिक अड्डा बंद होने के बाद अब चाबहार बंदरगाह का भारत की पहुंच से बाहर होना पश्चिम एशिया में देश की कूटनीति को लगा दूसरा रणनीतिक झटका है।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि शासन में निरंतरता एक जरूरी सच्चाई है, जिसे आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री कभी स्वीकार नहीं करते। उन्होंने एक्स पर कहा, भारत ने पिछली सदी के आखिरी दशक में भारत-अफगानिस्तान-ईरान सहयोग रणनीति के तहत चाबहार बंदरगाह में निवेश की संभावनाएं तलाशना शुरू किया था।
मई, 2013 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने चाबहार में 11.5 करोड़ डॉलर के निवेश को मंजूरी दी। यह फैसला तब लिया गया था, जब भारत अक्टूबर, 2008 में हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका परमाणु समझौता लागू करने के लिए बड़े कदम उठा रहा था। इसके बाद अक्टूबर, 2014 में चाबहार पहल को प्रधानमंत्री मोदी के विजन का हिस्सा बताकर प्रचारित किया गया। उन्होंने सवाल किया, 2026-27 के बजट में चाबहार के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया था। क्या इसका मतलब यह है कि भारत इस पयोजना से बाहर हो गया है, या फिर उसके निवेश संबंधी वादे फिलहाल पूरे हो चुके हैं?































