
अभियान के दूसरे दिन सरकारी अमले के साथ मौजूद रहा पुलिस बल
कोरबा। शहर में आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रशासन और नगर निगम एक्शन मोड पर है। घंटाघर रोड के किनारे काफी संख्या में ठेले गुमटियों को हटाने का काम आज किया गया। लोगों के विरोध को देखते हुए पुलिस बल भी मौजूद रहा। प्रभावित लोगों ने कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई और सवाल भी खड़े किए।
नगर निगम उपायुक्त के साथ अतिक्रमण विरोधी स्क्वाड में पुलिस के सहयोग से आज की कार्रवाई को अंजाम दिया। मिनीमाता गर्ल्स कॉलेज से एसईसीएल हेलीपैड की तरफ जाने वाले मार्ग पर सीमित हिस्से में इस कार्रवाई को किया गया। नगर निगम परिसर के सामने रोड के किनारे लंबे समय से ठेले गुमटियां संचालित थे, जिन्हें यहां से हटाने या जप्त करने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई की भनक लगने पर कारोबारी से संबंधित महिलाएं भी यहां पहुंची थी। इसलिए इनसे निपटने के लिए महिला पुलिस को भी डिप्लॉय किया गया। नगर निगम के अधिकारी पवन वर्मा ने बताया कि दरअसल ठेले गुमटियों के सामने हर समय भीड़ भाड़ रहती थी और इसके चक्कर में आए दिन दुर्घटनाएं हो रही थी। इस बात को ध्यान में रखते हुए प्लानिंग की गई और इसी के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया गया। कहा गया कि अस्थाई दखल हटाने से मौके पर हवा का मन बेहतर होगा और अनहोनी की आशंका भी नहीं रहेगी। एक दिन पहले भी यहां पर कार्रवाई की गई लेकिन यह दिखावे की रहीं।
ऑक्सीजोन पर किए गए अतिक्रमण से अधिकारी बेखबर
कोरबा शहरी क्षेत्र में आए दिन यहां वहां अतिक्रमण को लेकर प्रशासन और नगर निगम के द्वारा कार्रवाई की जा रही है। इन सबके बावजूद साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड कोरबा ईस्ट की जमीन पर तैयार किए गए ऑक्सिजोन में लगातार हो रहे अतिक्रमण के मामले में अधिकारी या तो कुछ करने की मानसिकता में नहीं है या फिर उनके भीतर इच्छाशक्ति की कमी है। इस क्षेत्र के पार्षद शैलेंद्र सिंह ने कई मौके पर इस बारे में शिकायत भी की। याद रहे पिछले वर्षों में मनमानी तरीके से यहां की जमीन को कुछ संगठनों को आवंटित करने का काम किया गया जिसे लेकर विवाद की स्थिति है। हर कोई अपने-अपने तरीके और प्रभाव से यहां पर जमीन हथियाने को लेकर लगा हुआ है। कहा जा रहा है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण इस मामले में किसी प्रकार के परिणाम सामने नहीं आ पा रहे हैं।
छलक उठे आंसू प्रभावितों के
संयुक्त रूप से की गई इस कार्रवाई ने संबंधित लोगों को टेंशन में डाल दिया और उनके सामने सामाजिक आर्थिक परेशानियां भी खड़ी कर दी। सबसे खास बात यह है कि संबंधित ठेले कोई 6 महीने साल भर से नहीं बल्कि बहुत लंबे समय चल रहे थे। संचालकों ने दावा किया कि उन्होंने बकाया इसके लिए परमिशन प्राप्त की थी और इस आधार पर काम किया जा रहा था। पूरी चीज अधिकारियों के संज्ञान में थी। अब जाकर कार्रवाई का सवाल क्यों आया, यह हमारी समझ से पड़े हैं। अपनी आंखों के सामने जीविका का साधन उजड़ते देख कई लोगों की आंखें नम हो गई। उन्होंने यहां तक कहा कि हम भी कुछ ऐसा ही देखना चाहेंगे।















