
गोकुल नगर खरमोरा कॉलोनी में समस्याएं
कोरबा। शहरी क्षेत्र में आवासीय कॉलोनीयों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है लेकिन परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आ रहे। पूर्ववर्ती गोकुल नगर स्थित हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी को नगर निगम के द्वारा हैंड ओवर कर लिया गया है। इसके बावजूद स्ट्रीट लाइट के अलावा दूसरी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हो सका है।
कॉलोनी में रहने वाले नागरिकों ने बताया कि रात्रि में यह पूरा इलाका अंधकार में डूबा रहता है कारण यह है कि कुछ समय पहले स्ट्रीट लाइट के आधे हिस्से को चोरों ने पार कर दिया । अब जो संख्या बची है ,उसमें तकनीकी फाल्ट है और इसलिए रात्रि में जब इनकी जरूरत होती है तो जलते नहीं। इसके चलते रात्रि कालीन आवागमन करना काफी मुश्किल भरा साबित हो रहा है। बताया गया कि वैसे ही औद्योगिक क्षेत्र में आए दिन तमाशा हो रहे हैं। इस वजह से भी यहां खतरे बने हुए हैं। आदर्श स्थिति को बहाल करने के लिए खासतौर पर रात्रि में समुचित प्रकाश व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है लेकिन इसकी कमी यहां पर लंबे समय से बनी हुई है। नागरिक संगठन की ओर से बनाया गया कि क्षेत्र में पक्की सडक़ जरूर है लेकिन यह भी आधे हिस्से में ही सिमट गई है। बाकी बचे इससे में जरूर की पूर्ति के लिए कई बार नगर निगम के साथ ही प्रशासन को अवगत कराया गया लेकिन इसकी पूर्ति करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता नहीं समझी गई। नागरिकों का कहना है कि जनता से लिए जाने वाले टैक्स के मामले में सिस्टम से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी तारीख को बाकायदा याद रखते हैं लेकिन सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर उनकी गंभीरता गुम हो जाती है। उन्होंने कहा कि यहां की समस्याओं के समाधान के लिए जल्द ही प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ-साथ नगरीय प्रशासन मंत्री के पास पत्राचार किया जाएगा ताकि कुछ तो राहत मिले।
कई हिस्सों में है इस तरह की समस्याएं
जानकारी मिली है कि रात्रि में स्ट्रीट लाइट के प्रकाश नहीं देने से संबंधित समस्याएं कोरबा नगर निगम के विभिन्न क्षेत्रों में बनी हुई है। इसके पीछे उसे व्यवस्था को सबसे बड़ा जिम्मेदार बताया जा रहा है जहां पर ऐसे कार्यों को ठेके पर दिया गया है। जानकारी मिली है कि कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों में लगातार निगरानी करने के साथ पर्याप्त मैनपॉवर को रखा जाना है ताकि परेशानी होने पर कम समय में निराकरण किया जा सके। जानकारों का कहना है कि इस प्रकार के कार्यों का ठेका लेने वाले ज्यादा कमाई के चक्कर में ना तो स्टाफ रखते हैं और ना ही लोगों की शिकायत पर ध्यान देना जरूरी समझते हैं। इसलिए समस्याओं का दायरा कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।






























