
नई दिल्ली 08 अगस्त। विधानसभा में तीन दिन तक चली तीखी बहस के बाद स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट कहा कि विधानसभा परिसर में कोई फांसी घर नहीं था। उन्होंने इस मामले को गहन जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भी सौंपने के निर्देश दिए। जो तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और तत्कालीन उपाध्यक्ष राखी बिड़ला को तलब करेगी। गुप्ता ने यह भी कहा कि केजरीवाल और अन्य के नाम वाली आधारशिला पट्टिका को हटाने का निर्णय लिया गया है। अध्यक्ष ने पहले सदन को बताया था कि जिस ढांचे का जीर्णोद्धार किया गया था और जिसका उद्घाटन 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने फांसी घर के रूप में किया था, वह रिकार्ड के अनुसार एक टिफिन कक्ष था। ऐसे दो कमरे हैं।
विधानसभा परिसर का 1912 का नक्शा दिखाते हुए, उन्होंने कहा था कि ऐसा कोई दस्तावेज़ या सबूत नहीं है जो दर्शाता हो कि उस जगह का इस्तेमाल फांसी देने के लिए किया जाता था। गुप्ता ने कहा कि किसी ऐतिहासिक इमारत के साथ छेड़छाड़ करना, किसी ऐतिहासिक संरचना को फांसी के फंदे या सुरंग के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत करना और इतिहास को गलत साबित करने का प्रयास करना, सच्चाई के विरुद्ध एक अक्षम्य अपराध है। उन्होंने कहा, यह सदन, इस विकृत और छलपूर्ण कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
अध्यक्ष ने कहा कि आम आदमी पार्टी, जो उस समय सत्ताधारी पार्टी थी, से इस तरह की संरचना के निर्माण को उचित ठहराने के लिए ठोस सबूत पेश करने का अनुरोध भी किया गया था।






















