
अररिया, २८ मार्च ।
अखबार और सब्जी बेचकर पत्नी को शिक्षिका बनाया। उम्मीद थी की दोनों बच्चों की परवरिश बेहतर तरीके से हो सकेगी और घर में खुशहाली आएगी। कभी नहीं सोचा था कि नौकरी मिलने के बाद पत्नी बेवफा निकल जाएगी और पति और बच्चों को ठुकरा कर दूसरे के साथ चली जाएगी। यह पीड़ा पूर्णियां जिला के केनगर थाना क्षेत्र के एक पति की है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी बौंसी थाना क्षेत्र के एक गांव में पंचायत शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं। स्कूल के समीप गांव में एक किराए के मकान में रहकर स्कूल आती जाती थी। सूचना मिली कि पड़ोस के एक सुनील राम के साथ प्रेम-प्रसंग में फरार हो गई। उसे न तो अपनी नौकरी की चिंता रही और न ही पति और दो मासूम बच्चों की। पीडि़त पति ने डीईओ, डीएम और बौंसी थाना में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीडि़त पति ने बताया कि उसकी पत्नी को पड़ोस के ही एक व्यक्ति और उनके माता-पिता व भाई ने साजिश रचकर बहकाकर भगा ले गए हैं। तीन दिन बाद भी उसका कहीं पता नहीं चल सका है।पीडि़त पति ने बताया कि वर्ष 2008 में नियोजन में शिक्षिका पद पर आवेदन दी थी। लेकिन किसी कारण से उस साल नियोजन नहीं सका था। हाईकोर्ट में मुकदमा लडक़र केस जीतने के बाद कोर्ट के आदेश पर 2018 में नियोजन पंचायत शिक्षिका के रूप में हुआ। शिक्षिका पद पर योगदान देने के बाद करीब सात-आठ माह तक वेतन नहीं मिला था। केस- मुकदमा, बच्चे की परवरिश और घर खर्चा चलाना मुश्किल हो गया था। सुबह में अखबार बांटते थे और दिनभर सब्जी बेचकर पत्नी और परिवार का खर्चा चलाते थे।पति ने बताया कि कर्ज का बोझ काफी बढ़ गया।
बैंक से ऋण, दोस्तों आदि से कर्ज लेकर किसी तरह काम चलाते रहे। अब सोचे थे कि दोनों मिलकर काम करेंगे तो जीवन बेहतर गुजरेगा। उन्होंने बताया कि वह वर्तमान में पूर्णियां में एक निजी कंपनी में सेल्समेन के रूप में जॉब कर रहे हैं। साथ जीने और मरने की कसमें खानें वाली पत्नी की इस करतूत ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है।स्कूल के प्रधानाध्यापक राकेश कुमार ने बताया कि तीसरे दिन भी शिक्षिका स्कूल से बिना सूचना अनुपस्थित रही। विभाग को मामले से अवगत कराया जा रहा है। लगातार स्कूल से बिना सूचना के अनुपस्थित रहने की जानकारी विभागीय अधिकारी को दी जा रही है। इधर थानाध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि शिक्षिका की बरामदगी का प्रयास जारी है।


























