असहमति नहीं झेल पाना कांग्रेस के विनाश का संकेत मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने मंगलवार को एक बार फिर अपनी ही पार्टी के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। अपने यूट्यूब चैनल मणि टॉक पर जारी एक वीडियो में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस पार्टी असहमति की आवाजों को बर्दाश्त नहीं कर सकती, तो यह उसके विनाश का संकेत है और अगर उसमें शालीन लेकिन दृढ़ भाषा में उस असंतुष्ट व्यक्ति को जवाब देने का साहस नहीं है तो वह शासन करने के योग्य नहीं है।उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र और कांग्रेस, दोनों का आधार वैचारिक मतभेद ही रहे हैं। क्या आज की कांग्रेस में असहमति के लिए कोई जगह नहीं है। शीर्षक वाले 23 मिनट के वीडियो में अय्यर ने कहा, कांग्रेस इसलिए जीवित है क्योंकि यहां असहमति रही है। कांग्रेस इसलिए बढ़ती है क्योंकि यहां कई राय मौजूद हैं। दुर्भाग्य से, वर्तमान नेतृत्व इस सबक को भूल गया है। अय्यर ने 1989 में संसद में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा दिए गए एक ऐतिहासिक भाषण का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने कहा था, केवल एक धर्मनिरपेक्ष भारत ही जीवित रह सकता है और यदि भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है, तो शायद उसे जीवित रहने का अधिकार नहीं है। अय्यर ने सीधे कांग्रेस आलाकमान पर निशाना साधते हुए कहा, मुझे कार्यसमिति से बाहर रखने वाले आलाकमान से मैं पूछता हूं – क्या आपमें राजीव गांधी के बेटे (राहुल गांधी) के मुंह से वही शब्द दोहराने की हिम्मत है जो संसद के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। राजीव गांधी अमर रहें। अय्यर ने वीडियो में नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक के दौर के उदाहरण दिए। उन्होंने इंदिरा गांधी के समय का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने असहमति को कुचलने के लिए इमरजेंसी लगाई, तो उसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस के साथ-साथ इंदिरा गांधी खुद रायबरेली से चुनाव हार गईं। अय्यर ने दावा किया कि राजीव गांधी ने अरुण नेहरू को कैबिनेट से तब निकाला जब उन्हें पता चला कि वह बाबरी मस्जिद के गेट खुलवाने के जिम्मेदार थे। बाद में पता चला कि बोफोर्स घोटाले के पीछे भी वही थे। उन्होंने याद दिलाया कि वीपी सिंह और आरिफ मोहम्मद खान जैसे नेताओं ने भी बगावत की थी, लेकिन कांग्रेस हमेशा असहमति की ताकत पर ही टिकी रही। अय्यर की यह टिप्पणी उनके और पार्टी के बीच बढ़ती तल्खी को दर्शाती है।
हाल ही में उन्होंने केरल में एक सेमिनार के दौरान माकपा नेता पिनाराई विजयन के दोबारा मुख्यमंत्री बनने का समर्थन किया था, जिससे पार्टी के भीतर काफी नाराजगी देखी जा रही है।

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