
पटना, 08 जनवरी ।
मकर संक्रांति आने में अब बस चंद दिन ही शेष हैं, लेकिन उससे पहले ही बिहार की राजनीति में सियासी तापमान तेजी से चढ़ता नजर आ रहा है। वजह है, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की सक्रियता। जिस तरह से है, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे अपने ही छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सियासी मात देने की तैयारी में हैं। बिहार में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि राजनीति का भी अहम मंच रही है। खासकर राजनीतिक दही-चूड़ा भोज का इतिहास लालू प्रसाद यादव से जुड़ा रहा है। लालू यादव ने वर्षों पहले इस परंपरा को एक सियासी आयोजन का रूप दिया था, जिसमें सत्ता और विपक्ष के बड़े चेहरे शिरकत करते थे। यह भोज केवल खान-पान तक सीमित नहीं रहता था, बल्कि यहीं से कई राजनीतिक संकेत और समीकरण भी निकलते थे। धीरे-धीरे अन्य दलों ने भी इस परंपरा को अपनाया, लेकिन लालू यादव का दही-चूड़ा भोज हमेशा सबसे अलग और चर्चित रहा। अब हालात बदले हैं। लालू प्रसाद यादव अस्वस्थ हैं और सक्रिय राजनीति से दूर हैं। वहीं तेजस्वी यादव इस तरह के पारंपरिक राजनीतिक आयोजनों में खास रुचि लेते नजर नहीं आते। ऐसे में राजद की इस सियासी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी तेजप्रताप यादव ने अपने कंधों पर ले ली है। तेजप्रताप 14 जनवरी, यानी मकर संक्रांति के दिन एक बड़े राजनीतिक दही-चूड़ा भोज की तैयारी में जुटे हैं।इस आयोजन को खास बनाने के लिए तेजप्रताप खुद मैदान में उतर गए हैं। वे व्यक्तिगत रूप से नेताओं के यहां जाकर भोज का न्योता दे रहे हैं। इसी कड़ी में वे हाल ही में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के आवास पहुंचे और उन्हें दही-चूड़ा भोज का निमंत्रण दिया।
इसके अलावा उन्होंने बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को भी न्योता दिया है। सबसे अहम बात यह है कि तेजप्रताप ने अपनी पार्टी की सीमाओं से बाहर निकलते हुए लगभग सभी एनडीए घटक दलों के नेताओं को भी आमंत्रण भेजना शुरू कर दिया है।राजनीतिक गलियारों में इसे तेजप्रताप की बड़ी सियासी फील्डिंग के तौर पर देखा जा रहा है। मकर संक्रांति का दिन बिहार की राजनीति में पहले भी कई बार पलटा-पलटी और बड़े राजनीतिक संदेशों का गवाह रहा है। ऐसे में इस बार भी अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या यह भोज केवल परंपरा निभाने का प्रयास है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है। सूत्रों की मानें तो तेजप्रताप जल्द ही अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी इस भोज का न्योता देने वाले हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी इसमें शामिल होते हैं या नहीं।
यह आयोजन राजद के अंदरूनी सियासी समीकरणों को भी नई दिशा दे सकता है। कुल मिलाकर, मकर संक्रांति से पहले तेजप्रताप यादव की सक्रियता ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। क्या यह सिर्फ एक पारंपरिक भोज है या फिर भविष्य की राजनीति का संकेतइसका जवाब अब सभी को 14 जनवरी का इंतजार करके ही मिलेगा।



























