विश्व पुस्तक मेले में कुरान के पन्नों से महक रहा ईरान, दिव्य वेद वाणी में सिमटा ब्रह्मांड का सार

नई दिल्ली। प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्तक मेले के गलियारों में ज्ञान, आस्था, विरासत और विलासिता की एक अनोखी जुगलबंदी देखने को मिल रही है। विश्व पुस्तक मेले जेन-जी, साहित्य और उपन्यासों के अलावा इस बार उन अजूबों को लेकर भी पाठकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां ज्ञान का भार केवल मस्तिष्क पर नहीं बल्कि तराजू पर भी तोला जा रहा है। यहां कहीं वेदों के रूप में ब्रह्मांड का सार सिमटा है, तो कहीं ईरान से आई पवित्र कुरान की आयतें अपनी खुशबू से पाठकों को सम्मोहित कर रही हैं।

हाथी पर सवार 20 किलो का ज्ञान पुंज

प्रगति मैदान के हाल नंबर-2 में प्रवेश करते ही आर्य समाज के स्टाल पर शाही अंदाज में सजी विशालकाय दिव्य वेद वाणी पुस्तक पाठकों को हैरान कर रही है। यहां एक विशाल हाथी की प्रतिकृति पर चार वेदों ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का सम्मिलित महाग्रंथ विराजमान है। जो लगभग 20 किलो का है और 6500 पृष्ठों में सनातन धर्म के ज्ञान की विशालता को समेटे हुए है। स्टाल के अधिकारियों ने बताया कि इस किताब की कीमत लगभग 47 हजार रुपये है। इस पुस्तक के निकट ही चार वेदों के सबसे छोटे पुस्तकों के स्वरूप भी प्रदर्शित किया गया है। इस ग्रंथ को पाठक देखने के साथ ही पढ़ने का भी प्रयास कर रहे है।

मलेशिया के पन्नों में महक रहा ईरान

विश्व पुस्तक मेले में ईरान के स्टाल पर सादगी और भव्यता का मेल कुरान में देखने को मिल रहा है। इसकी विशेषता केवल इसकी आयतें नहीं बल्कि इसकी बनावट है। इसके पृष्ठ मलेशिया की विशेष लकड़ी से तैयार किए गया हैं, जिसकी वजह से पन्ना पलटते ही एक भीनी- भीनी खुशबू पाठक को आकर्षित कर रही है। बेहतरीन लेदर कवर और 600 पृष्ठों पर की गई नक्काशीनुमा छपाई इसे कलाकृति का दर्जा देती है। मेले में आई ऐसी तीनों विशेष प्रतियां पहले ही बुक हो चुकी हैं।

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