
वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने खाड़ी देशों की सुरक्षा के सामने एक नई और गंभीर चुनौती पेश कर दी है। युद्ध की शुरुआत में जहां भारी मिसाइल हमलों का बोलबाला था, वहीं अब ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए ‘ड्रोन वारफेयर’ पर ध्यान केंद्रित कर दिया है।
सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन में हो रहे ड्रोन अटैक
हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया है कि मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत की गिरावट आई है। लेकिन, ईरानी ड्रोनों की निरंतर बौछार ने सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देशों की वायु रक्षा प्रणालियों पर भारी दबाव डाल दिया है।
ये ड्रोन न केवल सैन्य ठिकानों, बल्कि तेल रिफाइनरियों, ऊर्जा संयंत्रों और रिहायशी इलाकों को भी निशाना बना रहे हैं। उधर, ईरान द्वारा लगातार किए जा रहे ड्रोन हमलों के चलते अमेरिका और यूरोपीय अधिकारियों ने खाड़ी देशों को समर्थन बढ़ाने का फैसला किया है ताकि उनके पास आत्मरक्षा के लिए हथियारों की कमी न हो।
यूक्रेन से मदद और यूरोपीय देशों का समर्थन ईरानी ड्रोनों के बढ़ते खतरे को देखते हुए खाड़ी देशों ने अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ओर रुख किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पुष्टि की है कि बहरीन, जार्डन, कुवैत, कतर और यूएई जैसे देश यूक्रेन के साथ संपर्क में हैं।






























