
नई दिल्ली। आइआरसीटीसी घोटाले के मामले में आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पूर्व रेल मंत्री नेता लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव की याचिका का बुधवार को सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट में विरोध किया।
सीबीआइ ने तर्क दिया कि लालू समेत अन्य यह तर्क देकर मुकदमे से बच नहीं सकते कि जब ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया था, तब उनके खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं थी।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सीबीआई की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल डीपी सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ताओं पर मुकदमा चलाने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं था। उन्होंने अदालत को बताया कि इस संबंध में मार्च 2020 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी राय दी थी। डीपी सिंह ने आगे कहा कि चूंकि मामला लंबा खिंच रहा था, इसलिए बाद में कानून के अनुसार मंजूरी ली गई थी। डीपी सिंह ने कहा कि मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन मंजूरी ले ली गई।






























