सनातन धर्म को मिटाना आसान नहीं, यह अमर है सोमनाथ मंदिर को लेकर अमित शाह का बड़ा बयान

नईदिल्ली, १४ जनवरी ।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि भारत के सनातन धर्म, संस्कृति और जनमानस की आस्था को मिटाना आसान नहीं है। उन्होंने सदियों से सोमनाथ मंदिर को नष्ट करने के बार-बार प्रयासों के बावजूद इसके पुनर्निर्माण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि मंदिर पर हमला करने वाले अंतत: गायब हो गए, लेकिन मंदिर आज भी गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में समुद्र तट पर उसी स्थान पर शान से खड़ा है।वह गांधीनगर जिले के मानसा में 267 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। शाह ने कहा कि 16 बार नष्ट होने के बावजूद सोमनाथ मंदिर आज भी शान से खड़ा है और उसका झंडा आसमान में लहरा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वहां एक भव्य सोमनाथ कारिडोर का निर्माण भी किया जा रहा है। यह पूरी दुनिया को संदेश है कि भारत के सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और भारतीय जनता की आस्था को मिटाना इतना आसान नहीं है। यह सूर्य और चंद्रमा की तरह शाश्वत और अमर है।
सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, विश्वास और गौरव का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पूरे साल मनाया जाएगा। देशभर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। एक हजार साल पहले हमारे भव्य सोमनाथ मंदिर को महमूद गजनी ने नष्ट कर दिया था। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी, अहमद शाह, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब जैसे अन्य आक्रमणकारियों ने इस पर बार-बार हमले किए। लेकिन मंदिर का हर बार पुनर्निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि विध्वंसक विनाश में विश्वास रखते थे, और निर्माता सृजन में।शाह ने कहा कि आजादी के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल, जामनगर के महाराजा केएम मुंशी और देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से इस मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ। इन सभी ने इसे पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया था। इस संकल्प के पीछे यह भावना थी कि सोमनाथ पर हमला केवल एक मंदिर पर हमला नहीं था, बल्कि यह हमारी आस्था, हमारे धर्म और आत्मसम्मान पर हमला था।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर में गुजरात सरकार की ओर से 362 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाने वाली बायो कंटेनमेंट सुविधा वाली अंतरराष्ट्रीय तकनीक से युक्त बायो सेफ्टी लैब-4 तथा एनिमल बायो सेफ्टी लेवल लैब का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि पुणे की लैब के बाद गांधीनगर स्थित बीएसएल-4 प्राणघातक वायरस की पहचान करने और पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों की रोकथाम में अहम भूमिका निभाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक से युक्त यह लैब शोधकर्ता युवाओं के लिए भी नए अवसर खोलेगी। उन्होंने बताया कि 2014 में भारत में स्टार्टअप की संख्या 500 से कम थी, लेकिन आज ये दस हजार के पार हो गए हैं। इनक्युबेटर की संख्या छह से 95 तथा इनक्युबेशन स्पेस 60 हजार वर्गफीट से बढक़र नौ लाख वर्गफीट हो गया है। जबकि इस क्षेत्र में निजी निवेश 10 करोड़ से बढक़र 7000 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पेटेंट फाइलिंग की संख्या 125 से बढक़र 1300 से अधिक हो गई है। इससे पता चलता है कि भारत का युवा अब जॉब क्रिएटर बन रहा है।

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